#अव्यवस्था
September 19, 2026
हिमाचल के प्राइवेट अस्पतालों में पैकेज का खेल : 3 रुपये की सिरिंज 20 में बेच रहे, मरीज परेशान
थोक कीमत से कई गुना महंगे में मिल रहा सामान
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में निजी अस्पतालों में उपचार के नाम पर पैकेज का खेल सामने आया है। उपचार के दौरान इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं की खरीद कीमत और मरीजों से लिए जा रहे शुल्क में काफी अंतर होने का दावा किया जा रहा है।
दरअसल, निजी अस्पतालोंऔर उनसे जुड़े मेडिकल स्टोरों में इलाज कराने वाले मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।आरोप है कि कई जगह MRP पर छूट दिखाकर भी मरीज से वास्तविक लागत की तुलना में कई गुना अधिक रकम वसूली जा रही है।
जानकारी के अनुसार थोक बाजार में कुछ सिरिंज की कीमत करीब 3 से 5 रुपये के बीच बताई जा रही है। जबकि मरीज के बिल में इसके लिए 15 से 20 रुपये तक जोड़े जाने की शिकायत है। इसी तरह करीब 20 रुपये लागत वाले IV सेट के लिए 80 से 100 रुपये तक वसूले जाने के आरोप हैं।
गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के परिजन अक्सर उपचार को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक वस्तु की कीमत पर तत्काल सवाल उठाना उनके लिए मुश्किल होता है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर अधिक राशि वसूलने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सुंदरनगर क्षेत्र के कुछ निजी अस्पतालों में इलाज के पैकेज में ही सर्जिकल और मेडिकल कंज्यूमेबल्स को शामिल किए जाने की बात सामने आ रही है। इससे मरीजों को यह जानकारी आसानी से नहीं मिल पाती कि किस वस्तु के लिए कितनी राशि ली गई है।
आरोप है कि जब तीमारदार अलग से विस्तृत बिल मांगते हैं तो उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। इससे अस्पताल में इस्तेमाल हुए सामान की वास्तविक कीमत और बिल में दर्ज राशि के बीच अंतर की जांच करना भी मुश्किल हो जाता है।
नेरचौक और सुंदरनगर क्षेत्र में मेडिकल सुविधाओं के विस्तार के साथ निजी क्लीनिकों और स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी बढ़ी है। आरोप है कि 12 से 15 रुपये की थोक कीमत वाले सर्जिकल ग्लव्स की एक जोड़ी के लिए मरीजों से 50 से 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कैथेटर और ऑक्सीजन मास्क की कीमतों को लेकर भी कई गुना शुल्क लेने की शिकायतें सामने आई हैं।
मेडिकल कंज्यूमेबल्स के अलावा आर्थोपेडिक और कार्डियक उपचार में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट तथा अन्य इंप्लांट की कीमतों को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें इंप्लांट की कंपनी, गुणवत्ता, स्रोत और वास्तविक कीमत से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दी जाती।
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित नियामक संस्थाओं से निजी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल्स और इंप्लांट की कीमतों की निगरानी मजबूत करने की मांग उठ रही है। मरीजों को विस्तृत बिल और इस्तेमाल किए गए सामान की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना पारदर्शी उपचार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।