कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में प्रसूता मंजू शर्मा (रजनी शर्मा) की मौत का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। घटना के करीब 40 दिन बाद न्याय की मांग को लेकर लोगों का गुस्सा फिर सड़कों पर फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में लोग, सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक कुल्लू के रथ मैदान में एकत्र हुए और वहां से रोष रैली निकालते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।

 

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। हालात को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल और होमगार्ड के जवान तैनात किए।

 

यह भी पढ़ें : सीएम सुक्खू की सुधीर शर्मा को चुनौती, संपत्ति वैध है- तो डर क्यों रहे हो... "मैं हर जांच के लिए तैयार"

न्याय की लड़ाई अब आमरण अनशन तक पहुंची

प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि अब आंदोलन केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। पीड़ित परिवार और सामाजिक कार्यकर्ता बलदेव ठाकुर उर्फ बंटी सराजी सहित कई लोग आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते और मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा।

 

जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती हुई

मृतका मंजू शर्मा के पति सतीश शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी की मौत की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट में कई सवाल अनुत्तरित हैं और दोषियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि न्याय की उम्मीद में परिवार पिछले 40 दिनों से इंतजार कर रहा है, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि अनशन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

 

यह भी पढ़ें : 63 दिन बाद भी शिमला जिप की कुर्सी खाली, शह मात के खेल में टल रहा चुनाव, निर्दलीय बने किंगमेकर

डीसी कार्यालय के बाहर डटे प्रदर्शनकारी

रथ मैदान से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उपायुक्त स्वयं बाहर आकर बताएँ कि पहले सौंपे गए मांग पत्र पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। जब तत्काल कोई जवाब नहीं मिला तो प्रदर्शनकारी डीसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और आंदोलन को और तेज करने की घोषणा कर दी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल मंजू शर्मा को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग भी है। 

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: घर से मायके जाने को निकली महिला हुई लापता, मोबाइल भी बंद; थाने पहुंचा देवर

 

प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि—

 

  • मंजू शर्मा मौत मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
  • मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में बताई गई कथित खामियों की दोबारा समीक्षा हो।
  • क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में लंबे समय से खाली चल रहे स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद को तुरंत भरा जाए।
  • सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
  • डॉक्टरों और मरीजों, दोनों के व्यवहार की निष्पक्ष निगरानी की व्यवस्था हो।

राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने की चेतावनी

आंदोलन में शामिल समाजसेवी सुमित ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार जनता की आवाज नहीं सुनेगी तो वह राष्ट्रपति से मिले अपने राष्ट्रीय सम्मान भी उपायुक्त के माध्यम से लौटाने पर विचार करेंगे। उनका कहना था कि सम्मान तभी सार्थक हैं, जब आम लोगों को न्याय मिल सके।

 

यह भी पढ़ें : शिरगुल महाराज के मंदिर में अनहोनी : शिखर स्थापना से पहले ही हुआ राख- गांव में मातम

सरकार को दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन केवल कुल्लू तक सीमित नहीं रहेगा। इसे पूरे हिमाचल प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा। फिलहाल कुल्लू में मंजू शर्मा मौत मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और स्वास्थ्य व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें