#राजनीति
August 3, 2026
63 दिन बाद भी शिमला जिप की कुर्सी खाली, शह मात के खेल में टल रहा चुनाव, निर्दलीय बने किंगमेकर
बैठक में नहीं पंहुचे भाजपा-कांग्रेस के चुने हुए जिला परिषद सदस्य
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आए दो महीने से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन fgekpy की सबसे हाई-प्रोफाइल शिमला जिला परिषद को अब तक अपना चेयरमैन और वाइस चेयरमैन नहीं मिल सका है। इस सियासी देरी की मुख्य वजह सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच जारी कांटे की टक्कर और कुर्सी पर अपने-अपने चहेतों को बिठाने की मची होड़ मानी जा रही है।
दोनों दल बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए लगातार सियासी जोड़-तोड़ में जुटे हैं, जबकि दो निर्दलीय सदस्य इस पूरे चुनाव के सबसे बड़े 'किंगमेकर' बनकर उभरे हैं। सोमवार को चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी, लेकिन राजनीतिक खींचतान इतनी बढ़ गई कि जरूरी कोरम ही पूरा नहीं हो सका। कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के अधिकांश सदस्य बैठक में नहीं पहुंचे और चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही टल गई।
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शिमला जिला परिषद में कुल 25 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 12, कांग्रेस के 11 और दो निर्दलीय सदस्य हैं। चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव जीतने के लिए 13 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। यही वजह है कि किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है और दोनों निर्दलीय सदस्यों की अहमियत अचानक सबसे ज्यादा बढ़ गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस समय जिला परिषद की सत्ता की चाबी इन्हीं दो निर्दलीय सदस्यों के हाथ में है। जिस दल को उनका समर्थन मिलेगा, उसके लिए जिला परिषद की सत्ता का रास्ता आसान हो जाएगा।
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राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों प्रमुख दल अपने-अपने समर्थकों को चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की कुर्सी दिलाने के लिए हर संभव रणनीति बनाने में जुटे हैं। यही वजह है कि सहमति नहीं बन पा रही और चुनाव लगातार टलता जा रहा है। सोमवार को भी बचत भवन में प्रस्तावित बैठक में आवश्यक संख्या में सदस्य नहीं पहुंचे, जिससे चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। कोरम पूरा न होने के कारण प्रशासन को चुनाव स्थगित करना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जल्द ही कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक कर सकते हैं। बैठक में आगामी चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करने और बहुमत जुटाने के विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है। दूसरी ओर भाजपा भी अपने पक्ष में समीकरण मजबूत करने के प्रयासों में लगी हुई है।
सोमवार को चुनाव नहीं हो पाने के बाद अब जिला प्रशासन नई तारीख घोषित करेगा। अगली बैठक में चुनाव कराने की प्रक्रिया फिर शुरू होगी। इस बीच दोनों दलों की कोशिशें निर्दलीय सदस्यों का समर्थन हासिल करने पर केंद्रित रहेंगी।
डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि सोमवार को आयोजित बैठक में कोई भी जिला परिषद सदस्य उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि अब अगली बैठक के लिए सभी सदस्यों को भागीदारी संबंधी नोटिस जारी किए जाएंगे। पहली बैठक में दो-तिहाई यानी 17 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक थी, जबकि अगली बैठक में 50 प्रतिशत कोरम की शर्त लागू होगी।
शिमला जिला परिषद का चुनाव अब केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह कांग्रेस और भाजपा की राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। दोनों दल अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो निर्दलीय सदस्य किसका साथ देंगे और जिला परिषद की सत्ता की कमान किसके हाथ जाएगी।