शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों का पलायन लगातार बढ़ रहा है। राज्य सचिवालय में जारी सांख्यिकी ईयर बुक 2024-25 के ताजा आंकड़ों ने इस प्रवृत्ति को और स्पष्ट कर दिया है
सरकारी स्कूलों में घटे बच्चे
साल 2022-23 से 2024-25 के बीच मात्र तीन वर्षों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग एक लाख कम हो गई। इनमें 57,290 लड़के और 46,368 लड़कियां शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी संस्थानों को छोड़कर निजी स्कूलों का रुख किया।
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एक लाख बच्चा हुआ कम
साल 2022-23 में सरकारी स्कूलों में कुल 8,09,000 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि यह संख्या घटकर 2024-25 में 7,05,342 रह गई। यह गिरावट उन चिंताओं को और गहरा करती है, जो वर्षों से सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, सुविधाओं और शिक्षण वातावरण को लेकर उठती रही हैं।
क्यों घट रहा नामांकन?
विशेषज्ञों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण जुड़े हैं-
- अंग्रेजी माध्यम की बढ़ती मांग: अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों को ऐसा वातावरण मिले, जहां उनका अंग्रेजी में आत्मविश्वास मजबूत हो।
- निजी स्कूलों में आधुनिक शिक्षण पद्धति: स्मार्ट कक्षाएं, कौशल आधारित शिक्षा और टेक्नोलॉजी का उपयोग निजी स्कूलों की पहचान बन चुका है।
- सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी: कई स्कूल अभी भी बुनियादी अवसंरचना, खेल के मैदान, प्रयोगशाला और पुस्तकालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
- शिक्षकों की उपलब्धता पर सवाल: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और गुणवत्ता दोनों को लेकर अभिभावक असंतुष्ट दिखते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक असर
सांख्यिकी ईयर बुक में यह भी सामने आया है कि सबसे अधिक नामांकन में गिरावट ग्रामीण इलाकों में दर्ज की गई है। कई छोटे स्कूलों में तो स्थितियां इतनी गंभीर हो गई हैं कि-
- कुछ कक्षाओं में बच्चों की संख्या 20 से भी कम रह गई
- कई विद्यालयों के विलय या बंद करने तक की नौबत आ गई
दूसरी ओर, शिमला, कांगड़ा, सोलन और मंडी जैसे शहरी जिलों में निजी स्कूलों का विस्तार तेज़ी से हुआ है। यहां अभिभावक प्रतिस्पर्धी माहौल और अधिक परिणाम देने वाली शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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शिक्षक घटे कम, विद्यार्थी ज्यादा
दिलचस्प आंकड़ा यह है कि विद्यार्थियों की संख्या जहां एक लाख तक घट गई, वहीं शिक्षकों की संख्या में सिर्फ 699 की कमी दर्ज की गई।
- 2020-21 में शिक्षक: 66,402
- 2024-25 में शिक्षक: 65,703
यह स्थिति प्रशासन के सामने प्रबंधन और संसाधन संतुलन से जुड़ी नई चुनौतियां खड़ी कर रही है- जहां कुछ स्कूलों में शिक्षक कम हैं, वहीं कुछ में छात्र ही नहीं बचे।
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सरकार ने किया सुधारों का दावा
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली के अनुसार सरकार नामांकन बढ़ाने को लेकर गंभीर है और कई सुधार पहले ही लागू करने शुरू कर दिए गए हैं। 100 सरकारी स्कूलों में CBSE पैटर्न लागू किया जा रहा है। राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण जारी है, जहां- स्मार्ट क्लास, खेल सुविधाएं, परिवहन, तकनीकी लैब जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सभी सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य किया जा चुका है। कोहली का कहना है कि “इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आने वाले शैक्षणिक सत्र से दिखना शुरू हो जाएंगे।
स्थिति का व्यापक प्रभाव
यह बदलाव हिमाचल के शिक्षा ढांचे में दीर्घकालिक असर छोड़ सकता है-
- निजी शिक्षा पर घरेलू खर्च बढ़ेगा
- ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है
- सरकारी विद्यालयों के सामाजिक और सामुदायिक महत्व में कमी आ सकती है, लेकिन यदि सरकार आधुनिक और गुणवत्ता आधारित शिक्षा सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू कर पाई, तो सरकारी स्कूलों में फिर से विश्वास लौटने की संभावना बनी हुई है।
