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April 13, 2026

सुक्खू सरकार का वादा फेल : किसान ने सड़क पर बहाया 500 लीटर दूध, नहीं खरीद रहा था मिल्कफेड

प्लांट प्रभारी बोले- पुलिस थाने में की जाएगी किसान की शिकायत

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MILKFED MILK PURCHASE DELAY FARMER WASTES 500 LITRES SUKHU GOVERNMENT

मंडी। हिमाचल प्रेदश के मंडी जिला में एक पशुपालक द्वारा सड़कों पर दूध बहाने की घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। बल्ह क्षेत्र के किसान रवि सैनी ने सरकारी उपक्रम हिमाचल मिल्कफेड के चक्कर प्लांट के बाहर करीब 500 लीटर दूध बहाकर अपना विरोध जताया।

दो दिन से नहीं खरीदा दूध

रवि सैनी का आरोप है कि पिछले दो दिनों से प्लांट की ओर से उनका दूध नहीं लिया जा रहा था। रोजाना लगभग 500 लीटर दूध की आपूर्ति करने वाले इस किसान को इससे करीब 50 हजार रुपए का सीधा नुकसान उठाना पड़ा। मजबूरी में उन्होंने यह कदम उठाते हुए सारा दूध सड़क पर बहा दिया।

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सरकार के दावों पर सवाल

किसान ने इस पूरी घटना का वीडियो खुद बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। लोग इस मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं और इसे सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने के दावों से जोड़कर देख रहे हैं। वीडियो के जरिए राज्य के CM सुखविंदर सिंह सुक्खू की घोषणाओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

मंडी के चक्कर प्लांट के बाहर दूध बहाते हुए किसान।

कर्ज चुकाना हो जाएगा मुश्किल

रवि सैनी ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से डेयरी फार्मिंग कर रहे हैं और उनके पास करीब 30 गाय हैं। उन्होंने लगभग एक करोड़ रुपए का कर्ज लेकर यह काम शुरू किया था। हर महीने भारी बैंक किस्त चुकानी पड़ती है, ऐसे में दूध की खरीद बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है। उनका कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा।

 

चक्कर प्लांट के बाहर किसान ने लाया दूध।

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बढ़े दाम का फायदा कैसे मिलेगा?

सरकार की ओर से हाल ही में बजट में गाय और भैंस के दूध के दाम में 10-10 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। वर्तमान में मिल्कफेड के माध्यम से गाय का दूध 51 रुपए और भैंस का 61 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से खरीदा जा रहा है। मगर किसान का सवाल है कि जब प्लांट स्तर पर ही दूध नहीं लिया जा रहा, तो बढ़ी हुई कीमतों का लाभ आखिर उन्हें कैसे मिलेगा।

 

प्लांट प्रभारी ने दी सफार्ई

इस मामले में चक्कर प्लांट के प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने बताया कि प्लांट की अधिकतम क्षमता एक लाख लीटर है और इससे अधिक दूध को स्टोर करना संभव नहीं है। इसी कारण एरिया के अनुसार दूध की खरीद की जा रही है।

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जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश

उन्होंने यह भी कहा कि एक हफ्ता पहले पशुपालकों के साथ बैठक कर उन्हें इस व्यवस्था की जानकारी दे दी गई थी। साथ ही, उन्होंने किसान के इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत भी की जाएगी और कुछ लोग जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

 

बढ़ती चिंता और सवाल

इस घटना ने प्रदेश में डेयरी से जुड़े हजारों किसानों की चिंताओं को सामने ला दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर उत्पादन तो हो रहा है, लेकिन खरीद की व्यवस्था सही नहीं है, तो पशुपालकों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा।

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