#अव्यवस्था
April 13, 2026
हिमाचल : खाली सरकारी मकानों में बहता रहा पानी- जल शक्ति विभाग पर 10 लाख के बिलों का बोझ
विभाग पर बिना पॉलिसी बढ़ रहा आर्थिक बोझ
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी आवासों के लंबे समय तक खाली रहने का असर अब सीधे सरकारी खजाने पर पड़ता नजर आ रहा है। जल शक्ति विभाग हिमाचल प्रदेश के सामने एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है- जहां पानी के बिल वर्षों से लंबित पड़े हैं।
जानकारी के अनुसार, ये सभी बिल उस अवधि के हैं जब सरकारी क्वार्टर खाली पड़े थे। मगर पानी के कनेक्शन बंद नहीं किए गए। समय के साथ बिल जमा होते गए, लेकिन जिम्मेदारी तय न होने के कारण मामला उलझता चला गया।
अब स्थिति यह है कि छोटी-छोटी रकम जुड़कर लाखों तक पहुंच चुकी है। 288 मामलों में करीब 10.91 लाख रुपए के पानी के बिल वर्षों से पेंडिंग पड़े हैं। सिरमौर जिला के नाहन और पांवटा साहिब की सरकारी कॉलोनियों में सबसे ज्यादा बकाया सामने आया है।
यहां करीब 6.86 लाख रुपए के पानी के बिल लंबित हैं। DC ऑफिस, मेडिकल, पुलिस, वन और PWD से जुड़े आवासों में वर्षों से बिल जमा नहीं किए गए, जिससे यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा।
कुल्लू जिला में 2.31 लाख रुपए के बिल बकाया हैं। खासकर सरवरी और आसपास के सरकारी क्वार्टरों में यह समस्या बनी हुई है। वहीं, शिमला जिला के रामपुर, सुन्नी और रोहड़ू क्षेत्रों में करीब 98,471 रुपए की पेंडेंसी दर्ज की गई है। इसके अलावा मंडी जिला में भी 37,491 रुपए के बिल लंबे समय से अटके हुए हैं, जिनमें सुंदरनगर सहित कई सरकारी संस्थान शामिल हैं।
असल समस्या यह है कि जब ये सरकारी आवास लंबे समय तक खाली रहे, तब भी पानी के कनेक्शन जारी रहे। बाद में जब नए कर्मचारियों को आवास आवंटित किए गए, तो यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पुराने बकाया का भुगतान किसे करना है। पहले रहने वाले को, नए को या संबंधित विभाग को। इसी असमंजस के चलते यह मामला वर्षों से लटका हुआ है।
इस पूरे मामले ने एक बड़ी प्रशासनिक कमी को उजागर किया है। सरकारी स्तर पर अभी तक ऐसी कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है, जो खाली अवधि के दौरान बने बिलों की जिम्मेदारी तय कर सके। यदि जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो यह बकाया राशि आने वाले समय में और बढ़ सकती है।