शिमला। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या लगातार गहराती जा रही है। प्रदेश में लाखों युवा रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन सरकारी नौकरियों की सीमित उपलब्धता के कारण उनके लिए अवसरों का संकट बना हुआ है। राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी क्षेत्र में इतनी अधिक नौकरियां सृजित करना संभव नहीं है। इसी वजह से सरकार अब युवाओं को निजी क्षेत्र की ओर प्रेरित करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही है।
रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत युवा
प्रदेश के विभिन्न रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण की स्थिति पर नजर डालें तो अब तक 6,32,505 युवा बेरोजगार के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 3,34,511 पुरुष और 2,97,994 महिलाएं शामिल हैं।
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वर्गवार आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति (SC) के 1,78,294, अनुसूचित जनजाति (ST) के 38,510, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 89,914 और सामान्य वर्ग के 3,25,787 युवा रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत हैं।
जिलावार बेरोजगारों के आंकड़े
प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेरोजगार युवाओं का पंजीकरण अलग-अलग संख्या में हुआ है।
- मंडी जिला:
- सामान्य वर्ग: 79,855
- अनुसूचित जाति (SC): 41,747
- अनुसूचित जनजाति (ST): 1,589
- बिलासपुर जिला:
- सामान्य वर्ग: 27,925
- अनुसूचित जाति (SC): 12,041
- अनुसूचित जनजाति (ST): 1,133
- चंबा जिला:
- सामान्य वर्ग: 26,345
- अनुसूचित जाति (SC): 7,495
- अनुसूचित जनजाति (ST): 15,161
- हमीरपुर जिला:
- सामान्य वर्ग: 25,534
- अनुसूचित जाति (SC): 15,182
- अनुसूचित जनजाति (ST): 379
- कांगड़ा जिला:
- सामान्य वर्ग: 52,648
- अनुसूचित जाति (SC): 28,821
- अनुसूचित जनजाति (ST): 6,977
- किन्नौर जिला:
- सामान्य वर्ग: 200
- अनुसूचित जाति (SC): 1,623
- अनुसूचित जनजाति (ST): 4,220
- कुल्लू जिला:
- सामान्य वर्ग: 18,950
- अनुसूचित जाति (SC): 13,430
- अनुसूचित जनजाति (ST): 1,481
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- लाहौल-स्पीति जिला:
- सामान्य वर्ग: 8
- अनुसूचित जाति (SC): 54
- अनुसूचित जनजाति (ST): 3,971
- शिमला जिला:
- सामान्य वर्ग: 35,379
- अनुसूचित जाति (SC): 18,889
- अनुसूचित जनजाति (ST): 361
- सिरमौर जिला:
- सामान्य वर्ग: 21,934
- अनुसूचित जाति (SC): 14,967
- अनुसूचित जनजाति (ST): 510
- सोलन जिला:
- सामान्य वर्ग: 18,855
- अनुसूचित जाति (SC): 12,364
- अनुसूचित जनजाति (ST): 853
- ऊना जिला:
- सामान्य वर्ग: 18,154
- अनुसूचित जाति (SC): 11,681
- अनुसूचित जनजाति (ST): 853
सरकार के प्रयास और आगे की राह
राज्य सरकार यह स्वीकार कर चुकी है कि सरकारी नौकरियों की उपलब्धता सीमित है और सभी युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान करना संभव नहीं है। इसलिए, सरकार निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए उद्योगों को आकर्षित करने और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
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प्रदेश में स्टार्टअप्स, पर्यटन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर विकसित करने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार का कहना है कि स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नए जमाने के रोजगारों के लिए तैयार किया जाएगा।
सरकार के लिए बनी चुनौती
हालांकि, बेरोजगार युवाओं की बढ़ती संख्या प्रदेश सरकार के लिए एक चुनौती बनी हुई है। सरकार को चाहिए कि वह नए उद्योगों की स्थापना, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स को और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करे। ताकि, प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें और वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।
