बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में होनहारों की कमी नहीं है। प्रदेश के युवा हर क्षेत्र में अपनी सफलता का लोहा मनवा रहे हैं। हाल ही में घोषित हुए UGC-NET के परिणाम में हिमाचल के कई होनहारों ने बाजी मारी है।
अतुल ने बनाई अलग पहचान
इसी कड़ी में बिलासपुर जिला के घुमारवीं उपमंडल के अतुल धीमान ने भी देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। अतुल की उपलब्धि के बाद ग्राम पंचायत औहर के छोटे से गांव पलथीं का नाम आज शिक्षा जगत में गर्व के साथ लिया जा रहा है।
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JRF में किया टॉप
दरअसल, अतुल धीमान ने UGC-NET में 99.89 पर्सेंटाइल हासिल कर जूनियर रिसर्च फैलोशिप (JRF) प्राप्त की है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले अतुल ने यह सिद्ध कर दिया कि मजबूत इरादे और अनुशासित मेहनत के सामने परिस्थितियां कभी दीवार नहीं बन सकतीं।
घर पर रहकर की तैयारी
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जहां युवा बड़े शहरों में महंगी कोचिंग और ऑनलाइन कोर्स पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, वहीं अतुल ने अलग राह चुनी। उन्होंने घर पर रहकर ही पढ़ाई की योजना बनाई। रोजाना तय समय-सारिणी के अनुसार अध्ययन, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहन अभ्यास और विषय की बुनियादी समझ पर फोकस- इन्हीं तीन स्तंभों पर उन्होंने अपनी तैयारी खड़ी की।
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सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
अतुल ने टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन एवं मैनेजमेंट विषय में परीक्षा उत्तीर्ण की। उनका कहना है कि उन्होंने रटने की बजाय विषय को समझने और विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया। यही कारण रहा कि वे उच्च पर्सेंटाइल तक पहुंच सके।
शिक्षा की मजबूत नींव
अतुल की प्रारंभिक शिक्षा DAV स्कूल, घुमारवीं और बिलासपुर से हुई। बचपन से ही वे पढ़ाई में अव्वल रहे। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने स्वामी विवेकानंद डिग्री कॉलेज, घुमारवीं में प्रवेश लिया, जहां से उन्होंने स्नातक की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त की।
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जिज्ञासा बनी सबसे बड़ी ताकत
कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय कर लिया था। उनके शिक्षकों का कहना है कि अतुल हमेशा से ही होनहार रहे और किसी भी विषय को गहराई से समझने का प्रयास करते थे। यही जिज्ञासा आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।
किसे दिया सफलता श्रेय?
अपनी इस सफलता का श्रेय अतुल ने अपने माता-पिता, परिवारजनों और गुरुजनों को दिया है। उनका कहना है कि घर का सकारात्मक माहौल, बड़ों का आशीर्वाद और शिक्षकों का मार्गदर्शन उनके आत्मविश्वास की नींव है। कठिन समय में परिवार ने उनका मनोबल बढ़ाया और लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।
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क्षेत्र में जश्न का माहौल
अतुल की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे औहर क्षेत्र में खुशी की लहर है। गांव में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अतुल की सफलता से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने का साहस रखें।
युवाओं के लिए संदेश
अतुल का स्पष्ट संदेश है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी है लक्ष्य की स्पष्टता और निरंतर मेहनत। वे कहते हैं, “अगर मन में विश्वास और हौसलों में उड़ान हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
