मंडी। आज के दौर में जहां बेरोजगारी का शोर है और युवा सरकारी नौकरी न मिलने की रट लगाए रहते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने नौकरी नहीं मिलती की रट लगाने वाले युवाओं को आइना दिखा दिया है। एक साधारण परिवार में जन्मे तीन भाई-बहनों ने अपनी मेहनत, लगन और अनुशासन के दम पर सरकारी नौकरी हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार का नाम रोशन किया हैए बल्कि पूरे गांव को गर्व से भर दिया है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

मंडी के पैड़ी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले इस परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आज के समय में जहां सरकारी नौकरी पाना बेहद कठिन माना जाता है, वहीं इस परिवार के तीनों बच्चों ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

 

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दो साल पहले शुरू हुई थी सफलता की कहानी

यह सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। इस साधारण परिवार की सफलता का सफर दो साल पहले शुरू हुआ था, जब बड़ी बेटी सुरभि राणा ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर नर्सिंग ऑफिसर (स्टाफ नर्स) के पद पर चयन पाकर परिवार में खुशियों की नींव रखी थी। लेकिन असली धमाका तो अब हुआ है, जब सुरभि के पदचिह्नों पर चलते हुए उसके छोटे भाई-बहन कनिका राणा और शिवम राणा ने भी एक साथ सरकारी नौकरी की दहलीज लांघ ली है।

 

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एक साथ मिली दोहरी सफलता

कनिका राणा का चयन TGT (मेडिकल) के पद पर हुआ है, जबकि शिवम राणा TGT (नॉन-मेडिकल) के पद पर चयनित हुए हैं। खास बात यह है कि दोनों भाई-बहनों का चयन एक ही समय में हुआ, जिससे यह उपलब्धि और भी विशेष बन गई।

साधारण पृष्ठभूमि, असाधारण उपलब्धि

यह परिवार आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है, लेकिन शिक्षा और मेहनत को अपनी ताकत बनाकर तीनों भाई-बहनों ने यह सिद्ध कर दिया कि परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं। यह कहानी उन युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है] जो अक्सर संसाधनों की कमी को अपनी असफलता का कारण मान लेते हैं।

 

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साधारण स्कूल] असाधारण परिणाम

अक्सर माना जाता है कि बड़े स्कूलों में पढ़कर ही बड़ी सफलता मिलती है] लेकिन इन तीनों ने इस मिथक को तोड़ दिया। सुरभि, कनिका और शिवम तीनों की प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा विजय पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, पैड़ी से हुई है। एक छोटे से गांव के स्कूल से निकलकर सरकारी सेवाओं के शिखर तक पहुंचना विद्यालय की गुणवत्ता और इन विद्यार्थियों के अनुशासन को दर्शाता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य लेख राम नरवाल ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि इन बच्चों ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या रईसी की मोहताज नहीं होती।

 

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युवाओं के लिए प्रेरणा

मंडी के इस परिवार ने उन युवाओं को एक कड़ा संदेश दिया है जो असफलताओं से जल्दी घबरा जाते हैं। आर्थिक तंगी और सीमित अवसरों के बावजूद इन भाई-बहनों ने कभी हार नहीं मानी। आज उनके घर के बाहर बधाई देने वालों का तांता लगा है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा जब एक ही आंगन से तीन-तीन बच्चे सरकारी पदों पर आसीन हुए हों।

 

जिस परिवार ने कभी आर्थिक तंगी के दिन देखे थे, आज उसी परिवार के तीनों चिराग सरकारी सेवा में रहकर समाज की सेवा करेंगे। यह उपलब्धि केवल एक परिवार की जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए एक मशाल है जो कड़ी मेहनत के बल पर अपना भविष्य बदलना चाहते हैं।

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