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June 13, 2026
हिमाचल की बेटी ने रचा इतिहास: एयरफोर्स में बनी फ्लाइंग ऑफिसर; अब आसमान में उड़ाएंगी फाइटर जेट
दिवांशी ने पूरे क्षेत्र की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनने का हासिल किया गौरव
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव की बेटी ने वह इतिहास रच दिया है, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और फौलादी इरादों से इस बेटी ने उस मुकाम को हासिल कर लिया है, जिसे आज तक पूरे क्षेत्र की किसी भी महिला ने नहीं पाया था। हमीरपुर जिले की होनहार बेटी देवांशी शर्मा भारतीय वायुसेना (IAF) में फ्लाइंग ऑफिसर बन गई हैं। अब गांव की यह बेटी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए आसमान का सीना चीरते हुए फाइटर जेट उड़ाएगी। देवांशी की इस ऐतिहासिक सफलता से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा हिमाचल प्रदेश गर्व से सराबोर है।
नादौन विधानसभा क्षेत्र की नौहंगी पंचायत के एक बेहद छोटे और शांत गांव समहूं की रहने वाली देवांशी शर्मा ने रूढ़ियों को तोड़कर आसमान छूने का सपना देखा। वह अपने पूरे क्षेत्र की पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिन्हें भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन मिला है। इंजीनियर राजेश शर्मा (NTPC रायबरेली में कार्यरत) और माता नीना शर्मा की इस लाडली ने साबित कर दिया कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी आसमान पर कब्ज़ा किया जा सकता है।
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देवांशी बचपन से ही मेधावी थीं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर जिले के बरमाण स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई, जहां उन्होंने 10वीं और 12वीं में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से फिजिक्स (ऑनर्स) में बीएससी की डिग्री ली। डिफेंस के प्रति उनका जुनून इस कदर था कि उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से 'रक्षा एवं सामरिक अध्ययन' (Defence and Strategic Studies) में मास्टर डिग्री हासिल की, जिसने उनकी राह और आसान कर दी।
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अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान ही देवांशी ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) को न सिर्फ पास किया, बल्कि इसके बाद होने वाले कड़े SSB इंटरव्यू में भी सफलता का परचम लहराया। जून 2025 में उनका चयन तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित एयरफोर्स अकादमी के कठिन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए हुआ, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया।
आज, 13 जून 2026 को सिकंदराबाद एयरफोर्स अकादमी में आयोजित संयुक्त स्नातक पासिंग आउट परेड में देवांशी को आधिकारिक रूप से फ्लाइंग ऑफिसर का कमीशन मिला। इस भावुक और गौरवपूर्ण पल के दौरान 'पाइपिंग सेरेमनी' में देवांशी के पिता इंजीनियर राजेश शर्मा और मां नीना शर्मा ने खुद अपनी बेटी के कंधों पर अधिकारी रैंक के सितारे (बैज) लगाए। देवांशी अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा मानती हैं।
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देवांशी के परिवार का देश की सेवा से पुराना और गहरा नाता है। उन्हें सेना में जाने की मुख्य प्रेरणा अपने नाना, सेवानिवृत्त कर्नल रोशन लाल शर्मा से मिली। यही नहीं, देवांशी सेवानिवृत्त जोनल डायरेक्टर डॉ. ओपी शर्मा की पोती हैं, जिन्हें इसी वर्ष (2026 में) हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिष्ठित 'हिमाचल गौरव पुरस्कार' से नवाजा गया है। ऐसे में देवांशी ने दादाजी के गौरव को और आगे बढ़ाया है।
बेटी की इस स्वर्णिम सफलता पर पिता राजेश शर्मा ने भावुक होते हुए कहा, "देवांशी बचपन से ही खुद को सेना की वर्दी में देखकर देश सेवा करने का ख्वाब बुनती थी, आज उसका वह सपना सच हो गया।" वहीं, माता नीना शर्मा ने कहा, "अपनी बेटी को भारतीय वायुसेना की फाइटर यूनिफॉर्म में देखना हमारे जीवन का सबसे खूबसूरत और गर्व का पल है।"
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इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद हमीरपुर सहित पूरे हिमाचल प्रदेश में जश्न का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने देवांशी के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा दिया है। सभी का एक सुर में कहना है कि छोटे से गांव से निकलकर फाइटर जेट उड़ाने तक का देवांशी का यह सफर क्षेत्र की हजारों अन्य बेटियों के सपनों को नए पंख देगा और उनके लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनेगा।