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June 13, 2026

हिमाचल: 24 साल बाद बेटे ने दोहराया पिता का इतिहास, विवेक चौहान बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

आईएमए देहरादून में 24 साल पहले पिता बने थे सेना अधिकारी, आज वहीं पर बेटा बना लेफ्टिनेंट

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Lieutenant Vivek Chauhan

नाहन। कहते हैं कि अगर मन में कुछ बड़ा करने का जज्बा हो, लक्ष्य के प्रति समर्पण हो और मेहनत पर विश्वास हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के एक युवा ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। शिलाई क्षेत्र के कुजनाल गांव के बेटे विवेक चौहान ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न केवल अपने परिवार का सपना पूरा किया है, बल्कि 24 वर्ष पुराना पारिवारिक इतिहास भी दोहरा दिया है।

 

जिस सैन्य परंपरा की शुरुआत उनके पिता ने दो दशक पहले की थी, आज उसी गौरवशाली विरासत को बेटे ने आगे बढ़ाया है। इंडियन मिलिट्री अकादमी (आईएमए) देहरादून की ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड में विवेक चौहान भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हुए और उनके कंधों पर सेना के अधिकारी के सितारे उनके माता-पिता ने सजाए।

24 साल पहले पिता बने थे अधिकारी, अब बेटे ने बढ़ाया गौरव

यह उपलब्धि इसलिए और भी खास बन गई क्योंकि वर्ष 2002 में विवेक के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस चौहान भी इसी सैन्य परंपरा का हिस्सा बने थे। करीब 24 वर्ष पहले उन्होंने भी आईएमए देहरादून की ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर कदम रखते हुए भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। आज वही पिता अपने बेटे को सेना की वर्दी में देखकर गर्व से भर उठे। जिस परेड ग्राउंड पर कभी उन्होंने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की थी, उसी गौरवशाली परंपरा को अब उनके बेटे ने आगे बढ़ाया है।

 

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जब पिता और मां के हाथों सजे कंधे पर सितारे

शनिवार को आईएमए देहरादून के ऐतिहासिक चेतवुड हॉल के सामने जब सालाना पासिंग आउट परेड (POP) संपन्न हुई, तो चौहान परिवार के लिए वह जीवन का सबसे स्वर्णिम और भावुक कर देने वाला पल था। पिपिंग सेरेमनी के दौरान लेफ्टिनेंट विवेक चौहान के पिता, लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. चौहान और माता मोनिका चौहान ने खुद अपने लाडले के कंधों पर सेना के अधिकारी रैंक के बैज (सितारे) लगाए। चार वर्षों के बेहद कठिन और कठोर सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद जब विवेक ने देशसेवा की शपथ ली, तो माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

चार वर्षों की कठिन ट्रेनिंग के बाद विवेक चौहान बने लेफ्टिनेंट

लेफ्टिनेंट विवेक चौहान का सेना अधिकारी बनने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने तीन वर्ष तक नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद एक वर्ष का प्री-कमीशन प्रशिक्षण इंडियन मिलिट्री अकादमी, देहरादून में पूरा किया। लगातार चार वर्षों तक कठिन अनुशासन, शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता की कसौटी पर खरा उतरने के बाद विवेक ने भारतीय सेना में अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया।

 

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पासिंग आउट परेड में भावुक हुआ परिवार

आईएमए देहरादून में आयोजित पासिंग आउट परेड का दिन चौहान परिवार के लिए अविस्मरणीय बन गया। जब पाइपिंग समारोह के दौरान लेफ्टिनेंट विवेक चौहान के कंधों पर अधिकारी रैंक के सितारे उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. चौहान और माता मोनिका चौहान ने लगाए, तो यह क्षण गर्व और भावनाओं से भर गया। पूरा परिवार इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। दादी, माता-पिता और बड़े भाई के लिए यह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार की सैन्य विरासत के नए अध्याय की शुरुआत थी।

गिरिपार के युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

गांव कुजनाल, डाकघर लोजा मनाल और पूरे शिलाई क्षेत्र में विवेक चौहान की सफलता को लेकर उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि विवेक ने यह साबित कर दिया है कि छोटे गांवों के युवा भी बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं। उनकी उपलब्धि गिरिपार क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो भारतीय सेना और अन्य रक्षा सेवाओं में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

 

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राष्ट्रसेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा चौहान परिवार

विवेक चौहान ऐसे परिवार से आते हैं, जहां राष्ट्रसेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि एक गौरवशाली परंपरा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. चौहान वर्तमान में एनसीसी फर्स्ट बटालियन नाहन में कमांडिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं उनकी माता मोनिका चौहान शिक्षा विभाग में अध्यापिका हैं। परिवार के बड़े बेटे रजत चौहान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। अब परिवार की नई पीढ़ी के रूप में विवेक चौहान भी भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा की जिम्मेदारी संभालेंगे।

पिता बोले— बेटे पर है गर्व

लेफ्टिनेंट कर्नल जे.एस. चौहान ने कहा कि एक पिता के रूप में उनके लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण कोई नहीं हो सकता कि उनका बेटा भारतीय सेना का अधिकारी बनकर देश की सेवा करेगा। उन्होंने कहा कि विवेक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।

 

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सिरमौर और हिमाचल के लिए गौरव का क्षण

लेफ्टिनेंट विवेक चौहान की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिरमौर जिले, गिरिपार क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि सपने चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, यदि उन्हें पूरा करने का जुनून हो तो सफलता जरूर मिलती है।

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