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June 10, 2026
हिमाचल : पिता के बाद मां ने चपरासी की नौकरी कर पढ़ाया - बेटे ने निभाया अपना वादा, बना शिक्षक
टोसं नदी ने छीना पिता, 24 साल बाद शिक्षक बना बेटा
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बसी एक साधारण सी बस्ती से निकली यह कहानी सिर्फ एक युवक की सफलता की नहीं, बल्कि एक मां के अदम्य साहस, त्याग और संघर्ष की गाथा है। यह कहानी है अत्तर ठाकुर और उनकी मां बेसी देवी की- जिन्होंने जीवन की कठिनतम परिस्थितियों के बीच भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा।
वर्ष 2002 में टोंस नदी के एक हादसे ने इस परिवार की खुशियां छीन लीं। परिवार के मुखिया पंच राम की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उस समय परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
छह बच्चों की जिम्मेदारी और भविष्य की चिंता के बीच बेसी देवी को अकेले ही पूरे परिवार का सहारा बनना पड़ा। उस वक्त अत्तर महज आठ वर्ष के थे और शायद यह भी पूरी तरह नहीं समझते थे कि उनके जीवन से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।

पति के निधन के बाद बेसी देवी ने हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। चपरासी के पद पर नौकरी करते हुए उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश और शिक्षा की जिम्मेदारी निभाई। सीमित आय में घर चलाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया।

कई बार खुद की जरूरतों को नजरअंदाज किया, मगर बच्चों के सपनों को टूटने नहीं दिया। अत्तर ठाकुर अपनी मां के संघर्ष को रोज अपनी आंखों के सामने देखते थे। पहाड़ी रास्तों से कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना, सीमित संसाधनों में पढ़ाई करना और बिना किसी विशेष सुविधा के आगे बढ़ना उनके जीवन का हिस्सा था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को अपनी ताकत बनाया और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहे।

बताया जाता है कि बारहवीं कक्षा के दौरान उन्होंने अपनी मां से कहा था, “मां, मैं घर का सबसे बड़ा बेटा हूं, एक दिन सब ठीक कर दूंगा।” उस समय यह एक बेटे की भावनात्मक बात थी, लेकिन बाद में यही वाक्य उनके जीवन का लक्ष्य बन गया।
अत्तर ने शिलाई कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद अंग्रेजी विषय में परास्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान आर्थिक चुनौतियां लगातार सामने आती रहीं, लेकिन उन्होंने कभी अपने इरादों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। मां और बेटे दोनों ने हर कठिनाई का सामना धैर्य और विश्वास के साथ किया।

इस लंबे संघर्ष में परिवार के छोटे बेटे की नौकरी ने भी कुछ राहत पहुंचाई, जिससे आर्थिक स्थिति थोड़ी बेहतर हुई। वहीं, 31 दिसंबर 2025 को बेसी देवी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुईं। वर्षों तक परिवार के लिए संघर्ष करने वाली इस मां को शायद अंदाजा नहीं था कि कुछ ही महीनों बाद उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी उनका इंतजार कर रही है।
7 जून 2026 को जब CBSE PGT (अंग्रेजी) परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ और अत्तर ठाकुर के चयन की खबर आई, तो यह सिर्फ एक परीक्षा में सफलता नहीं थी। यह 24 वर्षों के संघर्ष, त्याग, धैर्य और विश्वास की जीत थी। यह उस मां की जीत थी जिसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों के सपनों को जिंदा रखा।

आज अत्तर सिंह ठाकुर की सफलता पर पूरा शिलाई क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है। वहीं, बेसी देवी का संघर्ष यह संदेश देता है कि एक मां का त्याग और विश्वास किसी भी कठिन परिस्थिति को सामना करने की ताकत रखता है।
टोंस नदी के किनारे एक हादसे से शुरू हुई यह दर्दभरी कहानी आज उम्मीद, मेहनत और सफलता की मिसाल बन चुकी है। यह केवल अत्तर ठाकुर की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस मां के अटूट हौसले की जीत है जिसने अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर चुनौती का सामना मुस्कुराकर किया।