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June 13, 2026

हिमाचल के इस परिवार की तीसरी पीढ़ी करेगी देश सेवा, बेटा साहिल भारतीय सेना में बना लेफ्टिनेंट

दादा, पिता चाचा सभी सेना में दे चुके सेवाएं, अब साहिल ने पहली सेना की वर्दी

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sahil jawalamukhi

ज्वालामुखी (कांगड़ा)। कहते हैं कि वीरभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश के रणबांकुरों के खून में ही देश सेवा का जज्बा बहता है। यहां की मिट्टी का हर दूसरा युवा देश की आन, बान और शान के लिए सर्वोच्च बलिदान देने का माद्दा रखता है। प्रदेश के युवाओं में देश सेवा का जुनून इस कदर भरा हुआ है कि इसे पूरा करने के लिए वे दिन-रात जीतोड़ मेहनत करते हैं और भारतीय सेना का अटूट हिस्सा बनते हैं।

परिवार की तीसी पीढ़ी करेगी देश सेवा

इसी गौरवशाली और अदम्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कांगड़ा जिले के विश्व विख्यात शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी की पावन धरती से संबंध रखने वाले साहिल ने भारतीय सेना में शामिल होकर इतिहास रच दिया है। रैंखा के मत्याल गांव के साहिल भारतीय सेना अकादमी देहरादून से शनिवार को पास आउट होकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए। साहिल की इस स्वर्णिम सफलता ने न केवल ज्वालामुखी क्षेत्र को गौरवान्वित किया है, बल्कि उनके पूरे परिवार के सिर को फक्र से ऊंचा कर दिया है। सबसे खास बात यह है कि साहिल अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सेना की पावन वर्दी पहनी है।

 

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बचपन से था आंखों में देश सेवा का सपना 

साहिल ने बचपन से अपने परिवार में सेना की गौरवशाली परंपरा को देखा और उसी से प्रेरणा लेकर देश सेवा का संकल्प लिया। सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल एक करियर नहीं बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने वर्षों तक कड़ी मेहनत की, कठिन प्रशिक्षण और प्रतियोगी चुनौतियों का सामना किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वह भारतीय सेना का हिस्सा बन गए।

परिवार की तीसरी पीढ़ी ने संभाली राष्ट्रसेवा की जिम्मेदारी

साहिल की उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उनके परिवार में देश सेवा की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। परिवार के वरिष्ठ सदस्य पहले भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और अब तीसरी पीढ़ी के रूप में साहिल ने इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाया है। परिजनों का कहना है कि परिवार में हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और साहिल ने उसी परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

 

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मां ज्वालामुखी की धरती पर खुशी का माहौल

साहिल के सेना में अधिकारी बनने की खबर मिलते ही ज्वालामुखी क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने परिवार को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया। लोगों का कहना है कि साहिल की सफलता क्षेत्र के युवाओं को प्रेरित करेगी और उन्हें भी देश सेवा के लिए आगे बढ़ने का हौसला देगी।

हिमाचल की पहचान हैं सैनिक परंपराएं

हिमाचल प्रदेश लंबे समय से देश को बहादुर सैनिक और सैन्य अधिकारी देता रहा है। प्रदेश के लगभग हर जिले में ऐसे परिवार मिल जाते हैं जिनकी कई पीढ़ियां सेना में सेवाएं दे चुकी हैं। यही वजह है कि हिमाचल को वीरों की भूमि कहा जाता है। साहिल की सफलता भी इसी गौरवशाली इतिहास का एक नया अध्याय मानी जा रही है, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमाचल के युवाओं में देश सेवा का जज्बा आज भी उतना ही मजबूत है।

 

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युवाओं के लिए प्रेरणा बने साहिल

साहिल की उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। उन्होंने यह साबित किया है कि समर्पण और दृढ़ निश्चय के बल पर देश सेवा का सपना भी साकार किया जा सकता है। आज साहिल केवल अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि कांगड़ा और पूरे हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं।

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