#उपलब्धि
June 12, 2026
हिमाचल की बेटी का देशभर में चमका नाम, PHD टॉपर बन रचा इतिहास- पूरा किया बचपन का सपना
देश के बड़े संस्थान में हासिल की बड़ी सफलता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की बेटियां अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। अब शिमला की रहने वाली प्रतिभाशाली छात्रा विपाशा श्रीवास्तव ने अपनी शानदार उपलब्धि से प्रदेश का नाम पूरे देश में रोशन किया है।
विपाशा ने भारत सरकार के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS), बेंगलुरु में मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास विषय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। उनकी इस सफलता के बाद संस्थान की ओर से उन्हें इंस्टीट्यूट फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है।
NIMHANS बेंगलुरु को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोसाइंसेज के क्षेत्र में यह देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में गिना जाता है। इस संस्थान में PHD प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा में देशभर के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। सभी को पीछे छोड़ते हुए विपाशा ने पहला स्थान हासिल किया और अपनी मेहनत का लोहा मनवाया।
विपाशा श्रीवास्तव बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार रही हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शिमला के दयानंद पब्लिक स्कूल और लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान विषय में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से क्लिनिकल साइकोलॉजी में मास्टर्स किया। अपनी रुचि और मेहनत के चलते उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया और लगातार सफलता हासिल करती गईं।
विपाशा ने चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सेक्टर-32 के मनोचिकित्सा विभाग से क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमफिल की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने एमफिल भी उच्च प्रथम श्रेणी के साथ पास किया। खास बात यह है कि एमफिल में प्रवेश के लिए आयोजित अखिल भारतीय परीक्षा में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया था। उनकी लगातार उपलब्धियां उनकी मेहनत और विषय के प्रति समर्पण को दिखाती हैं।
विपाशा का सपना हमेशा से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट बनकर समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काम करना रहा है। परिवार के अनुसार वह बचपन से ही लोगों की मदद करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने में रुचि रखती थीं। वर्तमान में वह रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के रूप में दिल्ली-एनसीआर में सेवाएं दे रही हैं।
विपाशा के पिता प्रो. अजय श्रीवास्तव हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता मृदुला श्रीवास्तव सतलुज जल विद्युत निगम से डिप्टी जनरल मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। परिवार ने हमेशा विपाशा को आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। आज उनकी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
विपाशा की इस सफलता के बाद शिमला और पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि उन्होंने साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और साधारण परिवारों से निकलकर भी युवा बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना सकते हैं। विपाशा श्रीवास्तव की यह उपलब्धि प्रदेश की उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही हैं।