#उपलब्धि
June 11, 2026
हिमाचल: 4 साल की उम्र में सिर से उठा था पिता का साया, मां ने नहीं हारी हिम्मत- बेटी बनी शिक्षक
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बेटी ने शिक्षक बन बढ़ाया मान
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। उपमंडल संगड़ाह के भुजोंड गांव की बेटी हिमांशी ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के आगे मुश्किलें ज्यादा देर तक टिक नहीं पातीं।
बचपन से ही सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बीच पली-बढ़ी हिमांशी ने TGT आर्ट्स भर्ती परीक्षा-2025 में सफलता हासिल की। उन्होंने ये सफलता हासिल कर ना सिर्फ अपना बल्कि अपनी मां का भी सपना पूरा किया है।
हिमांशी का चयन हिमाचल प्रदेश राज्य चयन प्रक्रिया के तहत आयोजित टीजीटी आर्ट्स भर्ती में हुआ है। परिणाम घोषित होने के बाद उनके घर में खुशी का माहौल है और क्षेत्रभर से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं।
हिमांशी की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है। बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। एक सड़क हादसे में पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उस समय हिमांशी महज चार साल की थीं।
परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां सुरेखा देवी के कंधों पर आ गई थी। सुरेखा देवी ने हार मानने के बजाय परिस्थितियों का डटकर सामना किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी।
सीमित आय के बावजूद उन्होंने हर चुनौती को स्वीकार किया और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं। वर्षों की तपस्या और त्याग का फल तब मिला जब हिमांशी ने TGT आर्ट्स परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
बेटी की उपलब्धि की खबर मिलते ही मां के खुशी के आंसू छलक उठे। उनके लिए यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि संघर्ष से भरे लंबे सफर की जीत है। हिमांशी ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपनी मां को देते हुए कहा कि उनकी मां ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
उन्होंने हर परिस्थिति में हौसला बढ़ाया और कभी भी उन्हें कमजोर नहीं पड़ने दिया। मां के विश्वास और मार्गदर्शन ने ही उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने की ताकत दी।
हिमांशी की इस उपलब्धि से भुजोंड गांव सहित पूरे संगड़ाह क्षेत्र में गर्व और खुशी का वातावरण है।