किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के वीरभूमि किन्नौर की माटी एक बार फिर गर्व से सिर ऊंचा किए खड़ी है, क्योंकि यहां के तरांडा गांव के जांबाज सैनिक हवलदार रोहित कुमार नेगी को देश के सर्वोच्च वीरता सम्मानों में से एक शौर्य चक्र से मरणोपरांत सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान उन्हें देश सेवा के दौरान दिखाए गए अद्वितीय साहस और अदम्य वीरता के लिए प्रदान किया गया। माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र की ओर से इस सम्मान को भव्य समारोह में प्रदान किया।
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वीरता की वो घटना जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
हवलदार रोहित कुमार नेगी, भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट से जुड़े थे। 8 अक्टूबर 2023 को जब वह जम्मू-कश्मीर के एक दुर्गम क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात थे, उसी दौरान एक भीषण हिमस्खलन की चपेट में आकर उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
ये इलाका न केवल दुर्गम था, बल्कि वहां मौसम की मार और भूगोल की कठोरता हर क्षण जान को खतरे में डालती है। मगर हवलदार रोहित नेगी ने अपने कर्तव्य से कभी समझौता नहीं किया और आखिरी सांस तक देश की रक्षा में डटे रहे।
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नौ महीने तक चला खोज अभियान
उनकी शहादत के बाद सेना ने लगातार 9 महीने तक उनका पार्थिव शरीर खोजने के लिए अथक प्रयास किए। ये अभियान किसी भी सैन्य खोज मिशन से कम नहीं था। कठिन बर्फीली परिस्थितियों और विषम भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय सेना ने अपनी कोशिशें जारी रखीं और अंततः वीर शहीद को ढूंढ निकाला। यह केवल एक पार्थिव शरीर नहीं था, बल्कि वह एक गाथा थी - बलिदान, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम की अमिट गाथा।
राष्ट्रपति ने दिया मां-पत्नी को हौसला
हवलदार रोहित कुमार नेगी को मरणोपरांत शौर्य चक्र से नवाजते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न केवल उनके बलिदान को सम्मानित किया, बल्कि पूरे देश की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रोहित की मां और पत्नी शौर्य चक्र हाथ में थामते ही फूट-फूट कर रोए। इस दौरान दौपदी मुर्मू ने शहीद रोहित की मां और पत्नी को हौसला दिया। यह सम्मान उनके परिवार, गांव और हिमाचल प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय बन गया।
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गांव में शोक और गर्व का मिला-जुला माहौल
तरांडा गांव में जब यह समाचार पहुंचा, तो हर आंख नम थी, लेकिन हर सिर गर्व से ऊंचा भी था। गांववालों ने दीप जलाकर, श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कर अपने वीर सपूत को याद किया। उनके परिवार को जहां अपने बेटे की शहादत पर अपार दुख है, वहीं उन्हें यह गर्व भी है कि उनका बेटा देश के लिए अमर बलिदानी बन गया।
रोहित के हैं दो छोटे बच्चे
शहीद रोहित नेगी के पिता अमर सिंह भी भारतीय सेना में रहे हैं। रोहित नेगी अपने पीछे 3 वर्षीय बेटे और 7 वर्षीय बेटी, पत्नी, बूढ़े मां-बाप तथा एक छोटे भाई को छोड़ गए हैं। रोहित को खोने के बाद परिवार की सारी खुशियां ही छिन गई हैं।
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प्रेरणा की मिसाल बने हवलदार रोहित
हवलदार रोहित कुमार नेगी की यह वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। उनका बलिदान यह बताता है कि सीमाओं पर तैनात हर सैनिक सिर्फ वर्दी नहीं पहनता, वह भारत माता की रक्षा की प्रतिज्ञा लेकर चलता है, और जब आवश्यकता हो, तो वह अपने प्राणों की आहुति देने में भी पीछे नहीं हटता।
