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June 9, 2026
हिमाचल के स्क्वाड्रन लीडर अर्शदीप 'वीर चक्र' से सम्मानित, 'ऑपरेशन सिंदूर' में धवस्त किए थे दुश्मनों के ठिकाने
सम्मान समारोह में बेटे को सम्मानित होता देख भावुक हुए माता पिता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि 'वीरभूमि' भी कहा जाता है। छोटा सा पहाड़ी राज्य होने के बावजूद देश की आन-बान और शान के लिए यहां के युवाओं की भूमिका हमेशा अग्रिम पंक्ति में रही है।
8 जून 2026 की सुनहरी संध्या ने हिमाचल के गौरवमयी इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य रक्षा अलंकरण समारोह में हिमाचल के 6 वीर सपूतों को उनके अदम्य साहस और अद्वितीय वीरता के लिए सेना के प्रतिष्ठित 'शौर्य चक्र' और 'वीर चक्र' से अलंकृत किया। इस ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाले क्षण में जब हिमाचल के सीने पर चार शौर्य चक्र और दो वीर चक्र सजे, तो पूरे प्रदेश का सिर फख्र से ऊंचा हो गया।
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असाधारण बहादुरी की इस सूची में सबसे चमकदार नाम हिमाचल की राजधानी शिमला के रहने वाले भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर अर्शदीप सिंह ठाकुर का है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें युद्ध काल के तीसरे सर्वोच्च वीरता पदक 'वीर चक्र' से सम्मानित किया।
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15 जून 2019 को वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट कमीशन होने वाले अर्शदीप वर्तमान में सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) स्क्वाड्रन का हिस्सा हैं। उन्होंने 7 मई 2025 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट रहते हुए आधी रात के अंधेरे में थल सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मौत को मात दी थी। दुश्मन के घातक हवाई और जमीनी हमलों के चक्रव्यूह को भेदते हुए उन्होंने अति विपरीत परिस्थितियों में अपने फाइटर जेट से सटीक निशाना लगाकर दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर दिया था।
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इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने स्क्वाड्रन लीडर अर्शदीप सिंह के माता अमरजीत कौर और पिता नरबीर सिंह ठाकुर राष्ट्रपति भवन में बेहद भावुक नजर आए। गर्व से भरी आंखों के साथ माता अमरजीत कौर ने कहा fd अपने बेटे को देश के सर्वोच्च मंच पर महामहिम राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होते देखना किसी भी माता-पिता के लिए जीवन का सबसे बड़ा और भावुक क्षण है। हमारे बच्चे ने देश की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत की है, आज हमारा जीवन धन्य हो गया।"
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मंडी, बिलासपुर, शिमला और ऊना के इन जांबाजों ने अलग-अलग दुर्गम और खतरनाक मिलिट्री ऑपरेशन्स में आतंकवादियों और दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं। हिमाचल प्रदेश के इन छह सपूतों को मिला यह सम्मान इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब-जब देश पर कोई आंच आएगी, देवभूमि के वीर अपने खून की आखिरी बूंद तक सरहदों की हिफाजत के लिए मुस्तैद रहेंगे।
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