ऊना। हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों होनहार युवा देश-विदेश में बड़े-बड़े पदों पर विराजमान है। इसी कड़ी में अब हिमाचल की एक और बेटी ने हिमाचल का नाम दुनियाभर में रोशन कर दिया है। हिमाचल के ऊना जिले की बेटी को अमेरिका में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
हिमाचल की बेटी को अमेरिका में मिली बड़ी जिम्मेदारी
उपतहसील दुलैहड़ के गांव बीटन की रहने वाली कोमल बीटन ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और वैज्ञानिक प्रतिभा के दम पर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनकी इस सफलता के लिए हिमाचल के डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री ने भी उन्हें बधाई दी है।
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डिप्टी CM गदगद- दी बधाई
डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री ने अपने फेसबुक अकाउंट पर कोमल बीटन की फोटो के साथ कैप्शन पोस्ट की है। उन्होंने लिखा-
आपको बता दें कि अमेरिकन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी ने कोमल को प्रतिष्ठित यंग एंबैसेडर के रूप में चयनित किया है, जो भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह सम्मान उन युवा वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जो अपने शोध कार्य के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।
गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
कोमल बीटन का सफर एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों तक पहुंचा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव बीटन के एक निजी स्कूल से पांचवीं कक्षा तक पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण शुरू से ही स्पष्ट था।
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कहां से की कोमल ने पढ़ाई?
छठी से बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा उन्होंने नया नंगल स्थित सेंट सोल्जर डिवाइन पब्लिक स्कूल से प्राप्त की, जहां उन्होंने लगातार अच्छे अंक हासिल किए। विज्ञान विषय में विशेष रुचि होने के कारण उन्होंने आगे चलकर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक शिक्षा का मार्ग चुना।
अमेरिका तक की उड़ान
कोमल ने मोहाली स्थित देश के प्रतिष्ठित संस्थान IISER से BS-MS की डिग्री हासिल की। यहां उन्होंने शोध आधारित पढ़ाई में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी अकादमिक उत्कृष्टता और शोध क्षमता को देखते हुए वर्ष 2021 में उन्हें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी मेडिकल सेंटर में पीएचडी के लिए शत-प्रतिशत स्कॉलरशिप मिली।
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पिछले चार वर्षों से कोमल वहां माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी जैसे अहम विषयों पर गहन शोध कर रही हैं। उनका शोध मानव स्वास्थ्य, संक्रमण नियंत्रण और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर समझने की दिशा में अहम योगदान दे रहा है।
यंग एंबैसेडर बनीं कोमल
कोमल के शोध कार्य, नेतृत्व क्षमता और वैज्ञानिक सोच को देखते हुए अमेरिकन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी ने उन्हें यंग एंबैसेडर चुना है। इस भूमिका में कोमल न केवल शोध कार्य को आगे बढ़ाएंगी, बल्कि युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने, विज्ञान को समाज से जोड़ने और वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व भी करेंगी।
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परिवार और समाज का मिला पूरा सहयोग
कोमल के पिता बालू राम बीटन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में कार्यरत हैं और साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। माता-पिता और परिवार के सहयोग ने कोमल को हर कदम पर आगे बढ़ने का हौसला दिया।
कोमल पर परिवार को गर्व
कोमल की दो बहनें और एक भाई हैं, जिनके बीच शिक्षा और संस्कारों का माहौल हमेशा बना रहा। परिवार का कहना है कि कोमल की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं।
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पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर
कोमल की इस सफलता से हरोली विधानसभा क्षेत्र और गांव बीटन में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों और युवाओं ने इसे मेहनत और लगन की जीत बताया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कोमल ने यह साबित कर दिया है कि छोटे गांवों से निकलकर भी विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कोमल
कोमल बीटन की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत सच्ची हो और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो कोई भी सीमा बाधा नहीं बन सकती।
