बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश को अक्सर वीरों की भूमि कहा जाता है, लेकिन यही पहाड़ वैज्ञानिक सोच, धैर्य और शोध की भी धरती रहे हैं। खेतों, प्रयोगशालाओं और विश्वविद्यालयों में वर्षों तक खामोशी से काम करने वाले एक हिमाचली वैज्ञानिक ने देश की खेती को नई दिशा दी  और अब उसी साधना को राष्ट्रीय पहचान मिली है। बिलासपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम लाल गौतम को इस गणतंत्र दिवस पर पद्म श्री सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की गई है। यह खबर सामने आते ही पूरे हिमाचल में गर्व और खुशी की लहर दौड़ गई है।

पद्म पुरस्कारों की घोषणा, हिमाचल का भी नाम

केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 के लिए पद्म पुरस्कारों की सूची जारी कर दी है। इस वर्ष देशभर की 131 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। ये पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाजसेवा और जनसेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिए जाते हैं। इसी सम्मान सूची में हिमाचल प्रदेश के एक बेटे का नाम जुड़ना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि माना जा रहा है।

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विज्ञान और खेती के क्षेत्र में हिमाचल का प्रतिनिधित्व

डॉ. प्रेम लाल गौतम को विज्ञान एवं इंजीनियरिंग श्रेणी के अंतर्गत कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने दशकों तक भारतीय कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कार्य केवल शोध पत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे तौर पर खेतों और किसानों तक पहुंचा।

बिलासपुर में जन्म, सोलन से पढ़ाई

डॉ. प्रेम लाल गौतम का जन्म 12 दिसंबर 1947 को बिलासपुर जिले में हुआ। प्रारंभिक जीवन पहाड़ी परिवेश में बीता, जहां खेती जीवन का आधार रही। उन्होंने हिमाचल कृषि कॉलेज, सोलन से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से एमएससी और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

वे कृषि आनुवंशिकी और पौध प्रजनन के क्षेत्र में देश के अग्रणी वैज्ञानिकों में शामिल रहे हैं। उनके शोध का केंद्र हमेशा यह रहा कि भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ऐसी फसल किस्में विकसित हों, जो किसानों की आय और उत्पादन दोनों बढ़ा सकें।

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खेत तक पहुंचा उनका शोध

डॉ. गौतम के शोध कार्यों का सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि उन्होंने प्रयोगशाला और किसान के खेत के बीच की दूरी कम की। उन्होंने गेहूं, सोयाबीन, फॉक्सटेल मिलेट, राइस बीन, अमरनाथ और बकव्हीट सहित 12 से अधिक उन्नत फसल किस्मों के विकास में अहम भूमिका निभाई।

इन किस्मों ने न केवल पैदावार बढ़ाई, बल्कि कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी किसानों को बेहतर विकल्प दिए। उनके कार्यों से कई राज्यों में कृषि उत्पादकता को मजबूती मिली।

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शीर्ष संस्थानों में निभाई बड़ी जिम्मेदारियां

अपने लंबे और प्रभावशाली करियर के दौरान डॉ. गौतम ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में उप महानिदेशक रहे, राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के निदेशक बने, गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति रहे और पादप प्रजाति संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी निभाई।

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वर्तमान में वे डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलाधिपति और करियर प्वाइंट यूनिवर्सिटी, हमीरपुर के प्रो-चांसलर हैं। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने शोध, शिक्षा और नीति निर्माण तीनों स्तरों पर कृषि क्षेत्र को दिशा दी।

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