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January 26, 2026
सावधान हिमाचल ! अगले 2 दिन तेज बर्फीले तूफान का अलर्ट जारी, आंधी के साथ होगी भारी बारिश
ऊंचाई वाले इलाकों में खतरा, पर्यटकों को सख्त चेतावनी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। आज रात से प्रदेश में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है, जिसके चलते अगले कुछ दिन मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला (IMD) ने स्थिति को गंभीर मानते हुए 27 जनवरी को चार जिलों कुल्लू, चंबा, लाहौल-स्पीति और किन्नौर में भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी है। खासकर पहाड़ी दर्रों, बर्फीले रास्तों और दुर्गम इलाकों में जाने से फिलहाल रोक लगाने की अपील की गई है।

IMD के अनुसार, इस वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर आज रात से 28 जनवरी की सुबह तक तेजी से देखने को मिलेगा, जिससे बर्फबारी और तेज़ हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
मौसम विभाग ने बताया है कि ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, सोलन और मंडी जिलों में 26 और 27 जनवरी को 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार से तेज आंधी-तूफान चलने की संभावना है।

वहीं, शिमला, कुल्लू और सिरमौर जिलों में 27 जनवरी को तूफान का विशेष अलर्ट जारी किया गया है। ऊंचे इलाकों में तेज हवाओं के साथ बर्फीला तूफान (ब्लिज़ार्ड जैसी स्थिति) बनने की आशंका है, जिससे दृश्यता कम होगी और सड़क यातायात पर असर पड़ेगा।
लाहौल-स्पीति और किन्नौर को छोड़कर प्रदेश के अन्य 10 जिलों में 27 जनवरी को शीतलहर का यलो अलर्ट जारी किया गया है। अनुमान है कि तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिलों में ओलावृष्टि का भी पूर्वानुमान है, जिससे फसलों और खुले में खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंच सकता है।

IMD के मुताबिक 28 और 29 जनवरी को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी जारी रह सकती है। 30 जनवरी को मौसम कुछ हद तक साफ होगा, जिससे राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है, क्योंकि 31 जनवरी को एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा और प्रदेश में फिर से अच्छी बारिश व बर्फबारी के आसार बन रहे हैं।
बीते सप्ताह हुई भारी बारिश और बर्फबारी का असर अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। प्रदेश में 3 नेशनल हाईवे समेत 832 सड़कें अभी भी बंद पड़ी हैं, जिससे कई क्षेत्रों का संपर्क टूट गया है। इसके अलावा 1942 बिजली के ट्रांसफॉर्मर और 245 पेयजल योजनाएं ठप होने से हालात और गंभीर हो गए हैं।

सड़कों के बंद होने से न केवल आम लोग बल्कि पर्यटक भी फंसे हुए हैं। कई गांवों और कस्बों में तीन-तीन दिन से बिजली गुल है, जबकि पेयजल योजनाएं जमने के कारण लोगों को पीने के पानी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर हैं, लेकिन हालात को देखते हुए आम लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की गई है। अनावश्यक यात्रा से बचने, मौसम अपडेट पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।