मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के रहने वाले भारतीय सेना में केप्टन पद पर तैनात टेकचंद शर्मा ने प्रदेश के साथ-साथ देश का नाम रोशन किया है। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए उच्च सम्मान से नवाजा गया, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में गर्व की लहर दौड़ गई है। उनकी इस उपलब्धि ने प्रदेश का सिर एक बार फिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
केप्टन के पद पर थे तैनात
बता दें कि टेकचंद शर्मा जिला मंडी की तहसील लडभड़ोल के गांव चुल्ला स्वर्गीय बलीराम के सुपुत्र हैं। वे पिछले कई वर्षों से देश सेवा में जुटे हुए हैं और उनका सेना में सफर मेहनत, अनुशासन और लगन की मिसाल है। बीते वर्ष 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें केप्टन पद पर पदोन्नति मिली थी और अब एक साल के भीतर ही वे मेजर बन गए हैं, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
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28 साल तक सूबेदार मेजर के पद पर दे चुकें हैं सेवाएं
टेकचंद शर्मा ने भारतीय सेना की जैक लाई रेजिमेंट में करीब 28 वर्षों तक सूबेदार मेजर के पद पर सेवाएं दी हैं। इस लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश और विदेश दोनों जगहों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने विदेश में चलाए गए अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।
देश-विदेश में लहराया काबिलियत का परचम
सेना में रहते हुए टेकचंद शर्मा संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशन के तहत साउथ सूडान में भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा भारत-भूटान परियोजना (इम्टराट) में भी उन्होंने अहम योगदान दिया है। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें यह पदोन्नति दी गई है।
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शिक्षा के क्षेत्र में भी शानदार रिकॉर्ड बना बना चुकें है टेकचंद
शिक्षा के क्षेत्र में भी टेकचंद शर्मा का रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्होंने वर्ष 1984 में हाई स्कूल तुलाह से दसवीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1989 में धर्मशाला कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि यहीं नहीं रुकी। उन्होंने 1995 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से एमए और 1996 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमफिल की डिग्री प्राप्त की, जिसमें वे गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे।
मेहनत और अनुशासन के बल पर बने मेजर
सेना में उन्होंने वर्ष 1997 में डायरेक्ट एंट्री के माध्यम से RT-JCO के पद पर कदम रखा। मेहनत और अनुशासन के बल पर वे लगातार आगे बढ़ते रहे और आज मेजर के पद तक पहुंचे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।
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लोग इसे मंडी और लडभड़ोल क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बता रहे हैं। टेकचंद शर्मा की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा है कि मेहनत और लगन से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
