#उपलब्धि
February 26, 2026
हिमाचल के छोटे से गांव की बेटी बनी नर्सिंग ऑफिसर, दिल्ली AIIMS में देगी सेवाएं
फोर्टिस अस्पताल में भी सेवाएं दे चुकी हैं श्रुति शर्मा
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ऊना। हिमाचल की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपनों को साकार करने का जज्बा जब मेहनत के साथ जुड़ जाता है, तो सफलता खुद कदम चूमती है।
जिला ऊना के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन रैंसरी की श्रुति शर्मा ने यह कर दिखाया है। गांव रैंसरी की होनहार बेटी श्रुति शर्मा का चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान AIIMS नई दिल्ली में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर हुआ है।
उन्होंने वहां अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। जैसे ही यह खबर गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, बधाइयों का तांता लग गया। परिवार, रिश्तेदार और ग्रामीण इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
श्रुति शर्मा, पिता राकेश कुमार और माता कमला देवी की पुत्री हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और श्रुति ने भी इस विश्वास को कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रुद्रा इंटरनेशनल स्कूल, बसाल से प्राप्त की।
10वीं कक्षा में उन्होंने 98 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का परिचय दिया। इसके बाद 12वीं कक्षा में भी 92 प्रतिशत अंक हासिल कर उन्होंने निरंतरता बनाए रखी। पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण शुरू से ही साफ दिखाई देता था।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने मुरारी लाल मेमोरियल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, सोलन में प्रवेश लिया और वर्ष 2022 में BSC. नर्सिंग की चार वर्षीय डिग्री सफलतापूर्वक पूरी की। कॉलेज के दौरान भी वे पढ़ाई के साथ-साथ व्यवहार और अनुशासन के लिए जानी जाती थीं।
डिग्री पूरी करने के बाद श्रुति ने वर्ष 2022 से 2025 तक फोर्टिस अस्पताल चंडीगढ़ में बतौर स्टाफ नर्स सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने मरीजों की देखभाल में संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें संस्थान की ओर से सम्मानित भी किया गया। करीब ढाई वर्षों का यह अनुभव उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

AIIMS में नर्सिंग ऑफिसर बनने के लिए ऑल इंडिया स्तर की नोरसेट (NORCET) परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। यह परीक्षा देशभर के हजारों अभ्यर्थियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के साथ आयोजित की जाती है।
श्रुति ने पूरी लगन और आत्मविश्वास के साथ इस परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल कर अपने सपने को साकार किया। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि छोटे गांव से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है- बशर्ते लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर।
श्रुति ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन और आशीर्वाद को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अपनी दादी रोशनी देवी तथा ताया ओमदत्त और ओंकार द्वारा समय-समय पर दी गई प्रेरणा को भी अपनी सफलता का आधार बताया।
धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में रुचि रखने वाली श्रुति का मानना है कि सकारात्मक सोच, अनुशासन और निरंतर परिश्रम ही सफलता की असली कुंजी है। उनका कहना है कि यदि लक्ष्य तय कर लिया जाए और पूरे समर्पण से मेहनत की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।
श्रुति शर्मा की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव रैंसरी और जिला ऊना के लिए गर्व का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रुति ने क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा का नया उदाहरण पेश किया है।
आज जब युवा पीढ़ी अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में श्रुति जैसी सफलता की कहानियां उम्मीद की नई रोशनी जगाती हैं। उनकी यह कामयाबी इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल की बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और अवसर मिलने पर देश के सर्वोच्च संस्थानों में भी अपनी पहचान बना सकती हैं।