#अव्यवस्था
January 29, 2026
हिमाचल : कई साल डॉक्टर बोलते रहे 'कुछ नहीं है', अब शरीर में फैला कैंसर- लाचार रोहित ने मांगी मदद
बेटे की हालत देख परिजन परेशान- लोगों से मदद की अपील
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांगड़ा जिले के रहने वाले 27 वर्षीय रोहित कुमार की कहानी न सिर्फ एक परिवार का दर्द है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की लापरवाही और देर से होने वाले निदान की भयावह सच्चाई भी उजागर करती है।
रोहित पिछले कई वर्षों से लगातार पेट दर्द की शिकायत कर रहे थे। दर्द कभी कम होता, कभी तेज, लेकिन हर बार जब वह डॉक्टरों के पास पहुंचे, तो उन्हें यही कहकर लौटा दिया गया कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है।
कभी गैस बताया गया, कभी सामान्य इंफेक्शन, तो कभी दवाइयों से ही आराम मिलने की उम्मीद दिलाई गई। इस भरोसे में साल गुजरते चले गए और बीमारी भीतर ही भीतर बढ़ती रही। हालात उस समय बिगड़ गए, जब हाल ही में रोहित का दर्द असहनीय हो गया और उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा। वहां किए गए ब्लड टेस्ट और स्कैन के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

डॉक्टरों ने बताया कि रोहित को पेट का कैंसर है, जो अब केवल पेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे शरीर और लिवर तक फैल चुका है। दर्द की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन रोहित की सर्जरी करनी पड़ी। डॉक्टरों ने साफ कहा कि अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं है और उन्हें जल्द से जल्द कीमोथेरेपी शुरू करनी होगी।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे रोहित के सामने अब एक और बड़ी चुनौती खड़ी है-पैसों की कमी। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वह महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
आज रोहित की जिंदगी इस बात पर टिकी है कि समय रहते कीमोथेरेपी शुरू हो सके, लेकिन इलाज की लागत उनके परिवार की पहुंच से बाहर है।

रोहित अपनी सेहत के कारण लंबे समय से काम पर नहीं जा पा रहा था। इससे उसकी नौकरी भी छूट गई- जिसके बाद से वो बेहद आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इलाज, अस्पताल और सफर के बीच परिवार की कमाई लगभग रुक चुकी है। परिवार ने अब तक किसी तरह रोहित का इलाज जारी रखा, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आगे का खर्च उठाना लगभग असंभव हो चुका है।
जवान बेटे की ऐसी हालत देख उसके परिजन बेहद परेशान हैं। बेटे को दर्द और तकलीफ में देखकर मानसिक रूप से बेहद व्यथित हैं। परिवार रात-दिन रोहित के सही-सलामत होने की कामना कर रहा है।

रोहित का परिवार कहता है कि हमने पूरी कोशिश की है कि इलाज किसी भी हाल में रुकने न पाए। अब हम आर्थिक रूप से बहुत कमजोर पड़ गए हैं। हम किसी से मजबूरी में नहीं, बल्कि अपने बेटे को बचाने की आस में मदद की गुहार लगा रहे हैं। रोहित की हालत नाजुक है और समय उनके खिलाफ जा रहा है। परिवार ने लोगों से अपील की है कि वे आगे आकर मदद करें, दान दें और इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा साझा करें, ताकि रोहित का इलाज शुरू हो सके।
रोहित के परिवार ने अपना गूगल पे नंबर और अकाउंट नंबर शेयर किया है। जो लोग भी रोहित की मदद करना चाहते हैं- वो इन नंबरों पर पैसे भेज सकते हैं।

परिवार का कहना है कि अगर शुरुआती दौर में रोहित की सही जांच होती, समय पर स्कैन और विशेषज्ञ सलाह मिलती- तो शायद कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता था।
प्रदेश में बार-बार यह दावा किया जाता है कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और मरीजों को गंभीरता से न लेना, ऐसे मामलों को जन्म दे रहा है।