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March 15, 2026

वीरभूमि हिमाचल के युवक का जज्बा: देश सेवा के लिए छोड़ी लाखों के पैकेज की नौकरी, बना लेफ्टिनेंट

ओम गौतम ने फ्रांस की मल्टीनेशनल कंपनी की छोड़ी लाखों की नौकरी

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Om goutam bilaspur

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश को वीरभूमि कहा जाता है। इस प्रदेश की मिट्टी में देशभक्ति का ऐसा जज्बा बसता है जहां का हर बच्चा देश सेवा का जज़्बा लेकर पैदा होता है। यहां के युवा मातृभूमि की सेवा के लिए बड़े से बड़े लालच को भी ठुकरा देते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण बिलासपुर जिले के एक होनहार युवक ने पेश किया है। बरठीं गांव से संबंध रखने वाले ओम गौतम ने लाखों रुपये के आकर्षक वेतन वाले विदेशी अवसर को छोड़कर देश सेवा का मार्ग चुना और भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होकर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।

लाखों के प्रस्ताव को ठुकराकर चुनी वर्दी

आज के समय में जहां अधिकांश युवा बड़े वेतन और आरामदायक जीवन की चाह में निजी क्षेत्र की नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं, वहीं ओम गौतम ने एक अलग राह चुनी। उन्हें फ्रांस की एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय संस्था में आकर्षक लाखों के वेतन पर काम करने का अवसर मिला था। यह अवसर उनके लिए सुख-सुविधाओं से भरा जीवन दे सकता था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाते हुए भारतीय सेना की वर्दी पहनने का निर्णय लिया और कठिन चयन प्रक्रिया को पार करते हुए अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया।

 

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पढ़ाई में भी रहे अव्वल

उपमंडल झंडूता के बरठीं गांव के ओम गौतम शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा शिमला स्थित प्रतिष्ठित विद्यालय से पूरी की और बारहवीं की परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद उन्होंने हमीरपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से अभियंत्रण की उपाधि प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान भी उनका लक्ष्य केवल अच्छी नौकरी पाना नहीं बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करना था।

 

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परिवार से मिला संस्कार और मार्गदर्शन

ओम गौतम की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार के संस्कार और मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके पिता केशव गौतम शिक्षा विभाग में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता रेखा गौतम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वरिष्ठ डेटा विश्लेषक के रूप में सेवाएं दे रही हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित किया।

 

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युवाओं के लिए बने प्रेरणा

ओम गौतम की यह सफलता केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं बल्कि हिमाचल की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें देश सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। लाखों के आकर्षक प्रस्ताव को ठुकराकर सेना में जाने का उनका निर्णय आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा सम्मान और गौरव धन से नहीं बल्कि मातृभूमि की सेवा से मिलता है। बिलासपुर के इस युवक की उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में गर्व और खुशी का माहौल है, और एक बार फिर यह साबित हो गया है कि वीरभूमि के युवाओं के दिल में देशभक्ति आज भी उतनी ही प्रबल है।

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