#उपलब्धि
March 7, 2026
हिमाचल के बेटे ने IFS और SAS के बाद पास की UPSC परीक्षा, पिता चलाते हैं छोटी सी वर्कशॉप
सीमित संसाधनों के बावजूद हिमाचल के जितेंद्र चंदेल ने तीसरी बार पाई बड़ी सफलता
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के युवा अक्सर सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से बड़े मुकाम हासिल करते हैं। इसी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बिलासपुर जिले के घुमारवीं उपमंडल के घुमाणी गांव के रहने वाले जितेंद्र चंदेल हैं। साधारण परिवार से संबंध रखने वाले जितेंद्र ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
जितेंद्र चंदेल ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करते हुए पूरे देश में 804वां स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे घुमारवीं क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। गांव और आसपास के क्षेत्रों से लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया जा रहा है।
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जितेंद्र चंदेल की यह पहली उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। वर्ष 2024 में उन्होंने भारतीय वन सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके साथ ही उन्होंने लेखा सेवा की परीक्षा भी पास की और वर्तमान में मंडी जिले के नेरचौक क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
हालांकि इन उपलब्धियों के बावजूद जितेंद्र का सपना इससे भी बड़ा था। उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज के लिए बेहतर कार्य करना था। इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने निरंतर मेहनत जारी रखी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी पास कर ली।
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जितेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा कंदरौर स्थित स्वामी विवेकानंद स्मारक विद्यालय से हुई, जहां से उन्होंने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने घुमारवीं के मिनर्वा विद्यालय से जमा दो की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर से प्राणी विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय से परास्नातक किया। वर्ष 2020 में उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा भी उत्तीर्ण की और इसके बाद जैव रसायन विषय में शोध कार्य के लिए प्रवेश लिया।
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जितेंद्र चंदेल का संबंध एक साधारण परिवार से है। उनके पिता संतोष चंदेल गांव में एक छोटी कार्यशाला चलाते हैं, जबकि उनकी माता कमलेश चंदेल गृहिणी हैं। सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। जितेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, पत्नी स्वाति और दोनों भाइयों को दिया है। उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और विश्वास ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
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जितेंद्र चंदेल की यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, सफलता हासिल की जा सकती है।