#उपलब्धि
March 6, 2026
हिमाचल: उम्र 23 साल और पहला प्रयास... बिना कोचिंग के ही अदित्य ने पास कर ली UPSC परीक्षा
अदित्य ने ऑल इंडिया रैंक 753 प्राप्त कर बढ़ाया परिवार का मान
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं है। आज के दौर में जहां एक ओर नशे का जाल युवा पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कई युवा अपनी लगन, अनुशासन और कड़ी मेहनत से छोटी उम्र में ही बड़े मुकाम हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। सीमित संसाधनों और छोटे शहरों से निकलकर भी हिमाचल के कई युवा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण जिला कांगड़ा के धर्मशाला से सामने आया है] जहां के होनहार युवा अदित्य धीमान ने महज 23 वर्ष की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। अदित्य ने ऑल इंडिया रैंक 753 प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे कांगड़ा और हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया है।
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सबसे खास बात यह है कि अदित्य धीमान ने यह उपलब्धि अपने पहले ही प्रयास में हासिल की है और इसके लिए उन्होंने किसी भी प्रकार की कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने स्वयं अध्ययन, अनुशासन और लगातार मेहनत के बल पर इस कठिन परीक्षा को पास किया। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते।
अदित्य धीमान ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के जरिए भोपाल स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था। यहां से उन्होंने पांच वर्षीय एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी और उसी मेहनत का परिणाम है कि उन्होंने पहली ही कोशिश में सफलता हासिल कर ली।
अदित्य एक शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता डॉ. संजय कुमार धीमान हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) के अधिकारी रह चुके हैं और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी माता कुशला धीमान स्वास्थ्य विभाग में वार्ड सिस्टर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं उनकी बहन कीर्ति धीमान भी चिकित्सा क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं और देहरादून के एक मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में डॉक्टर के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े अदित्य को बचपन से ही पढ़ाई और अनुशासन की प्रेरणा मिलती रही।
अदित्य धीमान मूल रूप से कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां क्षेत्र के धलूं गांव से जुड़े हुए हैं, हालांकि परिवार वर्तमान में धर्मशाला में रहता है। छोटे शहर और गांवों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गया है। अदित्य की इस उपलब्धि से यह संदेश भी मिलता है कि हिमाचल के युवा अगर सही दिशा में मेहनत करें तो वे देश की किसी भी बड़ी परीक्षा में अपना परचम लहरा सकते हैं।
अदित्य धीमान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन, शिक्षकों के सहयोग और निरंतर मेहनत को दिया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। आज जब समाज में कई चुनौतियां युवाओं के सामने हैं, ऐसे में अदित्य जैसे युवा यह साबित कर रहे हैं कि सही सोच, मेहनत और अनुशासन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उनकी सफलता हिमाचल के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।