#उपलब्धि
March 13, 2026
हिमाचल : छोटे से गांव की बेटी ने रचा इतिहास, दुनियाभर में बनाई अलग पहचान- हर ओर चर्चा
विश्व मंच तक पहुंचीं हिमाचल की बेटी डॉ. राधा
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के दूरस्थ शिलाई उपमंडल के एक छोटे से गांव बोबरी की बेटी डॉ. राधा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
वर्तमान में सोलन स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान की सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. राधा को दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थाओं में शामिल लिनियन सोसायटी ऑफ लंदन की फेलोशिप से सम्मानित किया गया है।
आपको बता दें कि यह फेलोशिप उन वैज्ञानिकों को मिलती है- जिन्होंने जैव विविधता, प्रकृति और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। डॉ. राधा की इस उपलब्धि को न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
इस सम्मान के साथ उनका नाम अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में और अधिक मजबूती से स्थापित हुआ है। वैज्ञानिक जगत में लिनियन सोसायटी की फेलोशिप को एक महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है, जिसे हासिल करना किसी भी शोधकर्ता के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।
डॉ. राधा का शोध कार्य मुख्य रूप से हिमालय के दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने वर्षों तक गद्दी, किन्नौरा और जौनसारी जनजातियों के बीच रहकर उनके पारंपरिक ज्ञान का अध्ययन किया। अपने शोध के दौरान उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि इन जनजातीय समुदायों द्वारा बीमारियों के उपचार और पशुओं की देखभाल के लिए किन-किन औषधीय पौधों का उपयोग किया जाता है।
अब तक डॉ. राधा करीब 1800 से अधिक औषधीय पौधों पर अध्ययन कर चुकी हैं। इन पौधों में मौजूद फाइटोकेमिकल तत्वों पर उनका वैज्ञानिक शोध कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने ला चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके शोध से भविष्य में नई औषधियों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएं खुल सकती हैं। इसके साथ ही उनका कार्य पारंपरिक जनजातीय ज्ञान को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
डॉ. राधा का शोध कार्य केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर भी अनुसंधान किया है। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, रूस, इथियोपिया, ब्राजील और न्यूजीलैंड जैसे देशों के वैज्ञानिकों के साथ उन्होंने विभिन्न शोध परियोजनाओं पर काम किया है।
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हाल ही में उन्होंने ANRF के सहयोग से उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी अपने शोध कार्य को प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन में दुनिया के कई देशों से आए वैज्ञानिकों ने उनके शोध की सराहना की और हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता पर किए गए उनके कार्य को महत्वपूर्ण बताया।
अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. राधा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे परिवार, गुरुजनों और समाज का बड़ा योगदान होता है। उन्होंने विशेष रूप से शूलिनी विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रो. पी.के. खोसला और अपने पीएचडी मार्गदर्शक प्रो. सुनील पुरी का आभार व्यक्त किया।
डॉ. राधा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता जट्टी राम और विद्या देवी, अपने शिक्षकों, शिलाई क्षेत्र के लोगों और शूलिनी विश्वविद्यालय के पूरे परिवार को दिया। उनका कहना है कि परिवार और शिक्षकों के सहयोग के बिना यह बड़ा मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।
डॉ. राधा की कहानी हिमालय के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभा और संभावनाओं का प्रतीक बनकर सामने आई है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में अपनी पहचान बनाई।
उनकी यह उपलब्धि विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह संदेश देती है कि यदि लगन, मेहनत और दृढ़ संकल्प हो तो छोटे से गांव से निकलकर भी दुनिया के बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश के लिए भी यह गर्व का विषय है कि यहां की बेटी ने विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की है।