देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिला से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक सड़क हादसे में परिवार ने अपना 17 साल का इकलौता बेटा खो दिया है। युवक की मौत से घर में मातम पसर गया है। मृतक युवक दो बहनों का इकलौता भाई था। यह हादसा कांगड़ा जिला के उपमंडल देहरा में हुआ है। बताया जा रहा है कि युवक बाइक पर सवार था और अनियंत्रित होकर उसकी बाइक एक पेड़ से जा टकराई। जिसमें युवक की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। मां और बहनों का रो रो कर बुरा हाल है।
मिली जानकारी के अनुसार देहरा की ग्राम पंचायत ठठलेहड़ के गांव अंब लाहड़ पोस्ट ऑफिस घेड़ मानगढ़ निवासी 17 वर्षीय आदर्श कुमार की एक भीषण दुर्घटना में मौत हो गई। परिवार का इकलौता सहारा और दो बहनों का इकलौता भाई यूं असमय दुनिया छोड़ जाएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था।
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नए कपड़ों के साथ घर लौट रहा था
बताया जा रहा है कि यह हादसे बीते रोज एनएच-503 पर खबली दोसड़का के पास उस समय हुआ, जब आदर्श देहरा बाजार से नए कपड़े खरीदकर घर लौट रहा था। रास्ते में उसकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े आम के पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा।
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मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय देते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया। पहले देहरा अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण उसे टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
22 दिन पहले ली थी नई बाइक
डॉक्टरों ने घायल आदर्श को बचाने का भरसक प्रयास किया, मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान आदर्श ने दम तोड़ दिया। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आदर्श गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनखंडी में प्लस टू का छात्र था। महज 22 दिन पहले उसने नई बाइक खरीदी थी। परिजनों के अनुसार बाइक लेने की उसकी जिद आखिरकार उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गई।
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दो बहनों का था इकलौता भाई
आदर्श अपने माता.पिता का इकलौता बेटा था और दो बहनों का इकलौता भाई। बड़ी बहन प्रिया बठिंडा में नर्स के रूप में कार्यरत है, जबकि छोटी बहन रिया चंडीगढ़ में एक निजी कंपनी में सीए है। पिता संजय कुमार एक छोटी दुकान चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी। परिवार को आदर्श से बड़ी उम्मीदें थीं। वह घर का इकलौता सहारा माना जाता था और माता.पिता के बुढ़ापे की लाठी समझा जाता था। उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया है।
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पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
इस दिल दहला देने वाली घटना से गांव में मातम पसरा हुआ है। रिश्तेदार, पड़ोसी, स्कूल के शिक्षक और सहपाठी सभी गमगीन हैं। हर कोई यही कह रहा है कि एक होनहार जिंदगी यूं अचानक खत्म हो जाएगी, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, अंब लाहड़ गांव में सन्नाटा है और एक परिवार अपने इकलौते बेटे को खोने के असहनीय दर्द से गुजर रहा है।
