शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टायफस ने एक बार फिर जानलेवा रूप धारण कर लिया है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में स्क्रब टायफस से पीड़ित 34 वर्षीय महिला की मौत हो गई। मृतक महिला सरोज, जिला शिमला के जुब्बल क्षेत्र की रहने वाली थी। यह राज्य में स्क्रब टायफस से इस सीजन में तीसरी मौत है, जबकि शिमला जिले में इस बीमारी से पहली मौत बताई जा रही है।
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इससे पहले जिला मंडी के करसोग क्षेत्र में दो मरीजों की जान स्क्रब टायफस ने ले ली थी। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने पहाड़ी व ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
क्या है स्क्रब टायफस ?
स्क्रब टायफस एक बैक्टीरिया जनित संक्रामक बीमारी है, जो व्तपमदजपं जेनजेनहंउनेीप नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया चिगर्स नामक एक प्रकार के पिस्सु के काटने से मानव शरीर में प्रवेश करता है। ये पिस्सु आमतौर पर झाड़ियों, खेतों और घास-फूस में रहने वाले चूहों के शरीर पर पाए जाते हैं।
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संक्रमण कैसे फैलता है?
मानसून के मौसम में जब किसान, बागवान या ग्रामीण लोग खेतों, बगीचों और घासनी क्षेत्रों में काम करते हैंए तो वे चिगर्स के संपर्क में आ सकते हैं। चिगर्स के काटने से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है और 7 से 10 दिन के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
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क्या होते हैं लक्षण
स्क्रब टायफस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे.धीरे यह घातक रूप ले सकता है:-
- तेज बुखार (104°F से 105°F तक)
- कंपकंपी और ठंड लगना
- तेज सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द
- शरीर के विभिन्न हिस्सों (गर्दन, कूल्हे, बगल) में लिम्फ नोड्स में सूजन
- कमजोरी, मानसिक भ्रम और सुस्ती
- त्वचा पर पपड़ी जैसी रैश या घाव (Eschar) – विशेष लक्षण
- अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी किडनी, फेफड़ों और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है, जिससे मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी
IGMC के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार स्क्रब टायफस से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। खासकर अगस्त-सितंबर के दौरान इसका प्रकोप ज्यादा होता है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाने की सलाह दी है।
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स्क्रब टायफस से बचाव के उपाय
1. खेतों और झाड़ियों में काम करते समय सावधानी बरतें:
- पूरी बांह के कपड़े पहनें और शरीर को ढक कर रखें।
- दस्ताने और जूते पहनकर ही घास काटें या खेतों में कार्य करें।
2. कीट प्रतिरोधी क्रीम या स्प्रे का उपयोग करें:
- DEET युक्त कीटनाशक क्रीम या स्प्रे शरीर पर लगाने से पिस्सुओं से बचा जा सकता है।
3. खेतों से लौटने के बाद साफ-सफाई रखें:
- तुरंत नहाएं और कपड़े गर्म पानी में धोएं।
- शरीर पर किसी कीड़े के काटने के निशान या रैशेज का ध्यान रखें।
4. पालतू जानवरों और घर की साफ-सफाई पर ध्यान दें:
- घर के आसपास की झाड़ियों और घास को समय-समय पर साफ करें।
5. लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- बुखार, रैशेज या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाएं।
