हमीरपुर। बेटियां आज सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि शासन और प्रशासन की दिशा भी तय कर रही हैं। राजस्थान की बेटी और हिमाचल के कांगड़ा जिले की बहू आईएएस गन्धर्वा राठौर इसका सशक्त उदाहरण हैं। प्रेम विवाह से लेकर प्रशासनिक शिखर तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। अब उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले हमीरपुर की कमान संभालकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि नेतृत्व में बेटियों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

कांगड़ा की बहू ने संभाली CM के गृह जिला की कमान

दरअसल सीएम सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए अपने गृह जिला की कमान IAS अधिकारी गन्धर्वा राठौर को सौंपी है। आईएएस अधिकारी गन्धर्वा राठौर राजस्थान की बेटी और हिमाचल की बहू हैं। गन्धर्वा राठौर ने हिमाचल के कांगड़ा जिला के आईएएस अधिकारी अनुराग से प्रेम विवाह किया है। बीते रोज बुधवार को उन्होंने औपचारिक रूप से जिला उपायुक्त का पदभार ग्रहण किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिले की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही गन्धर्वा राठौर प्रदेश की उन महिला अधिकारियों की कतार में शामिल हो गई हैं जो आज जिलों की कमान संभाल रही हैं।

 

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राजस्थान की बेटी है आईएएस गंधर्व राठौर

गन्धर्वा राठौर मूल रूप से राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखती हैं। पिंक सिटी नाम से मशहुर जयपुर से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद गन्धर्वा राठौर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बिना किसी कोचिंग के यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को उन्होंने दूसरे प्रयास में पास किया और 93वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनीं। उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े लक्ष्य हासिल करने का सपना देखते हैं।

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कांगड़ा के आईएएस अनुराग से किया प्रेम विवाह

आईएएस बनने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर मिला, जहां उन्होंने प्रशासनिक सेवाएं दीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात हिमाचल कैडर के आईएएस अधिकारी अनुराग चंदर से हुई। प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुई दोस्ती आगे चलकर प्रेम में बदली और वर्ष 2017 में दोनों ने लव मैरिज कर ली। अनुराग चंदर कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र के चकोल गांव के रहने वाले हैं और उन्होंने यूपीएससी में 11वीं रैंक हासिल की थी। विवाह के बाद गंधर्व राठौर ने मैरिज ग्राउंड पर अपना कैडर हिमाचल प्रदेश ट्रांसफर करवाया।

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कैडर ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान नहीं रही। उस समय पश्चिम बंगाल सरकार ने अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए उन्हें कार्यमुक्त करने से इनकार कर दिया था। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत के आदेश के बाद उन्हें हिमाचल कैडर में रिलीव किया गया। यह घटनाक्रम भी उनके प्रशासनिक सफर का एक अहम अध्याय रहा।

सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारना प्राथमिकता

हमीरपुर में पदभार संभालने के बाद गन्धर्वा राठौर ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझेगा और त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास योजनाओं को लेकर विशेष रूप से काम किया जाएगा।

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गौरतलब है कि आज हिमाचल प्रदेश में कई जिलों की कमान बेटियों के हाथों में है। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक संतुलन को मजबूत कर रहा है, बल्कि समाज में बेटियों की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाता है। आईएएस गन्धर्वा राठौर की नियुक्ति इसी बदलाव की एक मजबूत कड़ी मानी जा रही हैए जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

 

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