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January 14, 2026

मंत्री विक्रमादित्य के समर्थन में उतरे जयराम ठाकुर, बोले- CM सुक्खू नहीं, अफसर चला रहे प्रदेश

कांग्रेस नेता एक-दूसरे को कमजोर करने में उलझे

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Himachal Politics

शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। अब इस मुद्दे पर विपक्ष उनके समर्थन में उतर आया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में असल में सरकार नहीं, बल्कि अधिकारी शासन चला रहे हैं, जबकि मंत्री अपनी ही पीड़ा सार्वजनिक मंचों पर बयान देकर जाहिर कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता एक-दूसरे को कमजोर करने में उलझे

जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के भीतर भारी अंतर्विरोध दिखाई दे रहा है। एक मंत्री अफसरशाही पर सवाल उठाता है, तो दूसरा मंत्री उसी बयान को सार्वजनिक रूप से खारिज कर देता है।

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इससे साफ झलकता है कि सरकार के भीतर समन्वय का अभाव है और कांग्रेस नेता आपस में ही एक-दूसरे को कमजोर करने की राजनीति में उलझे हुए हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति बताया।

डाउटफुल इंटीग्रिटी अधिकारियों के हाथों सौंपी व्यवस्था

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों की निष्ठा पर मुख्यमंत्री ने स्वयं विपक्ष में रहते हुए सवाल उठाए थे, आज वही अधिकारी सरकार के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली चेहरे बन चुके हैं।

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जयराम ठाकुर ने कहा कि डाउटफुल इंटीग्रिटी वाले अधिकारियों के हाथों में पूरी व्यवस्था सौंप दी गई है, जिससे शासन-प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब पहले ऐसे मुद्दे उठाए गए थे, तब कांग्रेस सरकार में रहते हुए किसी ने विरोध नहीं किया।

जयराम ठाकुर ने किया दावा

उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में अव्यवस्थाओं का माहौल बना हुआ है और यह बात अब केवल विपक्ष नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के मंत्री भी स्वीकार कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने दावा किया कि अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है और कुछ चुनिंदा अधिकारियों के इशारे पर फैसले लिए जा रहे हैं, जिसका सीधा असर हिमाचल के विकास और जनहित पर पड़ रहा है।

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सरकार में बैठे मंत्री असहाय महसूस कर रहे हैं

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चाहे नेता हो या अधिकारी, सभी को प्रदेश के हित में काम करना चाहिए। यदि सरकार में बैठे मंत्री खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं और खुलेआम बयानबाजी कर रहे हैं, तो यह मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए बड़ी चुनौती है कि वह यह तय करे कि प्रदेश चलाने की जिम्मेदारी चुने हुए प्रतिनिधियों के पास रहे या अफसरों के हाथों में।


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