शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार अप्रैल का महीना भी सर्दियों जैसा एहसास करा रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बदलते मौसम ने लोगों को हैरान कर दिया है। बारिश, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि और बागवानी पर भी असर पड़ रहा है।
यहां हुई बारिश और बर्फबारी
मनाली, चंबा और कुकुमसारी सहित कई इलाकों में दिनभर रुक.रुक कर बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदलाव के चलते तापमान में भी तेज गिरावट आई है। भुंतर, मनाली, मंडी और सुंदरनगर जैसे क्षेत्रों में पारा लुढ़कने से ठंडक बढ़ गई है।
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कल कई जिलों में आंधी तूफान का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने आज कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि आने वाले दिनों के लिए कई क्षेत्रों में आंधी और तूफान का येलो अलर्ट भी जारी है। अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 20 अप्रैल तक मौसम का यह मिजाज बना रह सकता है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे लाहौल-स्पीति और किन्नौर की चोटियों पर हल्की बर्फबारी के भी आसार हैं। आज रात में लाहौल स्पीति व किन्नौर की ऊंची चोटियों पर हल्का हिमपात और अन्य जिलों में बारिश के आसार है। कल और परसों भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिला में आंधी, तूफान को लेकर येलो अलर्ट दिया गया है।
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किसानों और बागवानों की बढ़ी चिंता
लगातार खराब हो रहे मौसम ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय सेब के पेड़ों में फ्लावरिंग का दौर चल रहा है, जिसमें साफ मौसम बेहद जरूरी होता है। बारिश और ओलावृष्टि से फूलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है, जिससे आने वाली फसल पर असर पड़ सकता है। कई क्षेत्रों में पहले ही ओलावृष्टि से नुकसान की खबरें सामने आ चुकी हैं।
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वहीं खेतों में तैयार खड़ी गेहूं की फसल पर भी मौसम का खतरा मंडरा रहा है। तेज हवाएं और बारिश फसल को गिराकर नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश
इस बार अप्रैल में बारिश ने भी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। महीने के शुरुआती दिनों में ही सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार अभी अगले कुछ दिन और राहत मिलने के आसार कम हैं, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज जहां ठंडक का अहसास करा रहा है, वहीं खेती-बागवानी से जुड़े लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। अब सबकी नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
