#राजनीति
April 16, 2026
पंचायत चुनाव पर CM सुक्खू का मास्टरस्ट्रोक: कार्यकर्ताओं को दिया फ्री हैंड; नहीं होगा कोई पार्टी बंधन
पंचायत चुनाव पर बोले सीएम सुक्खू र्टी के सिंबल या पार्टी आधार पर नहीं लड़ेंगे चुनाव
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। गांव की सरकार पर काबिज होने के लिए सूबे की दो प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और भाजपा ने अपनी.अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। एक ओर जहां विपक्षी दल भाजपा ने प्रत्याशी चयन के लिए फिल्टर लगाना शुरू कर दिया है, वहीं मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बड़ा बयान देकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए मैदान पूरी तरह से खुला छोड़ दिया है।
पंचायत चुनावों को लेकर भाजपा इस बार बेहद आक्रामक और संगठित मोड में नजर आ रही है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह मैदान में अधिकृत प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। इसके लिए भाजपा ने जिला परिषद् और प्रधान पद के चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों से तीन-तीन नामों का पैनल 23 अप्रैल तक मांगा है। भाजपा की रणनीति साफ है पैनल के जरिए सबसे मजबूत चेहरों को छांटना और उन्हें पार्टी के समर्थन के साथ चुनावी समर में उतारना।
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वहीं दूसरी तरफ भाजपा की इस रणनीतिक घेराबंदी के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में हुई पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक के बाद सियासी माहौल को नया मोड़ दे दिया। मीडिया से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पंचायत चुनाव पार्टी के सिंबल या पार्टी आधार पर नहीं लड़ेगी।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होगा। कोई भी कार्यकर्ता, कहीं से भी अपनी मर्जी से चुनाव लड़ सकता है। चाहे प्रधान का पद हो या बीडीसी, कार्यकर्ता अपनी क्षमता के अनुसार मैदान में उतरने के लिए स्वतंत्र हैं।
मुख्यमंत्री ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय का दावा करते हुए कहा कि पंचायत चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का वह हिस्सा हैं जहां स्थानीय जुड़ाव मायने रखता है। उन्होंने कहा कि क्योंकि ये चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होते, इसलिए पार्टी किसी भी उत्साही कार्यकर्ता को चुनाव लड़ने से नहीं रोकेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुक्खू का यह ओपन फील्ड कार्ड दरअसल गुटबाजी को रोकने और हर स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा पर 'राजनीतिक रोटियां' सेकने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना परिसीमन के बिल लाना केवल दिखावा है। उन्होंने याद दिलाया कि पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की बुनियाद राजीव गांधी ने रखी थी और सोनिया गांधी ने इस बिल को राज्यसभा में पारित कराया था।