शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार की माली हालत लगातार खराब होती जा रही है। राज्य की आमदनी और खर्च में बड़ा अंतर है, जिससे सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। अब सरकार ने अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 322 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड (सरकारी प्रतिभूतियों) बेचने का फैसला किया है। यह बॉन्ड 10 साल की अवधि के लिए होंगे और इनकी नीलामी 11 मार्च 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा की जाएगी।
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सरकार के वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इस बॉन्ड से मिली रकम का इस्तेमाल राज्य के विकास कार्यों में किया जाएगा। हालांकि, सरकार की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि इस रकम का एक बड़ा हिस्सा पिछले कर्जों के ब्याज और वेतन-पेंशन भुगतान में ही चला जाएगा।
राज्य सरकार का बढ़ता कर्ज
हिमाचल प्रदेश सरकार पहले ही भारी कर्ज के बोझ तले दबी हुई है। राज्य की वार्षिक आय करीब 16 हजार करोड़ रुपये है, जबकि खर्च 27 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। बीते दो वर्षों में सरकार ने करीब 28 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जिसमें से 10 हजार करोड़ रुपये तो केवल पुराने कर्जों के ब्याज चुकाने में चले गए। सरकार ने 8 हजार करोड़ रुपये पिछले कर्ज के मूलधन के रूप में लौटाए हैं।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद यह स्वीकार किया है कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती हर महीने वेतन और पेंशन के भुगतान के लिए 2000 करोड़ रुपये की जरूरत को पूरा करना है। यही वजह है कि सरकार को बार-बार नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं।
नीलामी और निवेशकों के लिए मौका
आरबीआई के जरिए होने वाली इस नीलामी में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने ब्याज दर (कूपन रेट) नीलामी के आधार पर तय करने का निर्णय लिया है। यह बॉन्ड 12 मार्च 2035 को परिपक्व होंगे और निवेशकों को हर साल 12 मार्च और 12 सितंबर को ब्याज मिलेगा।
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वर्तमान में हिमाचल सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि राज्य की वित्तीय गाड़ी कर्ज के सहारे ही चल रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संकट से उबरने के लिए आने वाले समय में क्या ठोस कदम उठाती है।
