शिमला। हिमाचल प्रदेश में जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है और अब सुक्खू सरकार ने सरकारी राशन डिपुओं में दालों के दाम बढ़ाकर लोगों पर एक और बोझ डाल दिया है। इस माह से डिपो में मिलने वाली दालें 6 रुपये से लेकर 18 रुपये तक महंगी कर दी गई हैं। चार माह बाद डिपुओं में दालों की आपूर्ति तो शुरू हो गई, लेकिन बढ़े हुए रेटों ने उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है।

साढ़े 19 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर

प्रदेश की लगभग 80 फीसदी आबादी सस्ता राशन पाने के लिए सरकारी डिपो पर निर्भर है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ना सीधे तौर पर लाखों परिवारों के बजट को प्रभावित करेगा। राज्य में 19,40,968 राशन कार्डधारक हैं, जिनमें से 11,32,818 एपीएल और 7,46,034 एनएफएसए श्रेणी के उपभोक्ता हैं। दालों के दाम बढ़ने का सीधा असर अब इन प्रभावितों की जेब पर पड़ेगा।

 

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कहीं बाजार के बराबर ना हो जाएं दाम

दालों के दाम बढ़ने से जहां एनएफएसए उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक भार बढ़ेगा, वहीं एपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए भी यह नई दरें राहत के बजाय परेशानी लेकर आई हैं। बता दें कि यदि दालों के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो जल्द ही बाजार और डिपो के दामों में कोई खास अंतर नहीं बचेगा और डिपो से सस्ता राशन लेने का मकसद ही खत्म हो जाएगा।

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सरकार से राहत की उम्मीद

महंगाई पहले ही लोगों के बजट को अस्त-व्यस्त कर रही है। अब डिपो में दालों के दाम बढ़ने के कारण आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ना तय है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार को बढ़ी कीमतों पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह बढ़ोतरी बड़ा झटका है। सुक्खू सरकार द्वारा बढ़ाए गए दामों को लेकर उपभोक्ताओं में नाराज़गी है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग जल्द ही स्थिति की समीक्षा कर दामों में राहत देगा।

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