शिमला। आपने सुना ही होगा ! क्या पैसे पेड़ों पर उगते हैं ? तो हां, अगर हिमाचल की बात करें तो हां यहां पैसे पौधों पर उग रहे हैं। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने एक ऐसी योजना चला रखी जो इस बात को साबित कर देगी।
वन घेरा भी बढ़ेगा, रोजगार भी मिलेगा
सरकार एक ऐसी योजना चला रही है जिससे वन आवरण तो बढ़ेगा ही, लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इस योजना का उद्देश्य समुदाय आधारित दृष्टिकोण से वनों के संरक्षण और विकास को सुदृढ़ करना है।
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कई मंडल व समूह किए जाएंगे शामिल
इस योजना को प्रदेश में पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये की लागत से लागू किया जाना है। इसमें महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य पंजीकृत सामुदायिक समूहों को वनीकरण गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।
इतनी जमीन पर पेड़ लगाने की सहायता
इसके लिए प्रदेश में पौधा रोपण के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान हो चुकी है। गांवों में विभाग की टीमों ने बाकायदा इसको लेकर सर्वे किया था। योजना में ग्राम पंचायतों और युवा मंडलों को 1 से 5 हेक्टेयर जमीन पर पेड़ लगाने के लिए सहायता दी जाएगी।
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जिंदा पौधों पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
हर समूह को प्रति हेक्टेयर वृक्षारोपण पर 1.20 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। अगर जमीन 1 हेक्टेयर से कम है तो सहायता आनुपातिक रूप से दी जाएगी। पौधों के जीवित रहने की दर के आधार पर अतिरिक्त 1.20 लाख प्रति हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
नजदीकी वन अधिकारी से करें संपर्क
सरकार द्वारा चलाई गई इस योजना का नाम है- राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना। अगर कोई ग्राम पंचायत या युवा मंडल इसका लाभ लेना चाहता है तो उन्हें अपने नजदीकी वन रक्षक या क्षेत्रीय वन अधिकारी से संपर्क करना होगा।
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जमीन निरीक्षण हेतु आएंगे कर्मचारी
पंजीकरण के बाद वन विभाग के कर्मचारी गांव में आकर जमीन का निरीक्षण करेंगे। वे देखेंगे कि जमीन पौधा रोपण के लिए सही है या नहीं, वहां कितने पौधे लगाए जा सकते हैं और किस प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे।
इन प्रजातियों को लगाने पर होगा लाभ
पौधे लगाने के लिए कुछ खास प्रजातियों को ही चुना गया है। इन जगहों पर-
- बान, ब्यूल जैसे स्थानीय पेड़
- फल देने वाले पौधे जैसे- कचनार और बुरांश लगाए जाएंगे।
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पर्यावरण की रक्षा में शामिल होंगे लोग
इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि गांव के लोगों को भी फल और लकड़ी का लाभ मिल सकेगा। इस योजना का मकसद प्रदेश में हरियाली बढ़ाना और लोगों को पर्यावरण की रक्षा में शामिल करना है।
