कांगड़ा। हिमाचल की बेटी पुष्पा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। धर्मशाला साई सेंटर की इस होनहार खिलाड़ी को भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तानी सौंपी गई है। छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर अब देश की टीम की कमान तक पहुंच गया है।

छोटे गांव से शुरू किया सफर, 12 साल से कबड्डी में बहा रहीं पसीना

पुष्पा ने एक छोटे से गांव से निकलकर कबड्डी में अपनी अलग पहचान बनाई है। पिछले करीब 12 साल से वह लगातार कबड्डी के मैदान में मेहनत कर रही हैं। उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि अब उन्हें देश की महिला कबड्डी टीम की कप्तानी करने का मौका मिला है। उनकी यह कहानी हिमाचल के युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है।

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3 एशियन गेम्स और विश्व कप खेल चुकी हैं पुष्पा

पुष्पा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार अनुभव रहा है। वह अब तक 3 एशियाई खेल और 1 विश्व कप खेल चुकी हैं। इस बार उनका चयन लगातार 5वीं बार एशियाई खेलों के लिए हुआ है। खास बात यह है कि इस बार वह खिलाड़ी के तौर पर ही नहीं, बल्कि भारतीय टीम की कप्तान के रूप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

धर्मशाला सेंटर के लिए ऐतिहासिक पल

SAI धर्मशाला के प्रभारी जे.पी. शाहनी ने पुष्पा को कप्तान बनाए जाने को केंद्र के इतिहास का बेहद खास और ऐतिहासिक पल बताया है। वहीं, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और कोच पूजा ठाकुर ने कहा कि पुष्पा की यह उपलब्धि पूरे हिमाचल प्रदेश और देश के लिए गर्व की बात है।

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पुष्पा बोलीं- भारत के लिए गोल्ड जीतना है लक्ष्य

भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने कहा कि भारतीय टीम की कप्तानी मिलना उनके और उनके परिवार के लिए बेहद गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि टीम काफी मजबूत है और कैंप में सभी खिलाड़ी जमकर मेहनत कर रही हैं।

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टीम का एक ही लक्ष्य है कि एशियाई खेलों में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता जाए। पुष्पा ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच को भी दिया और कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने में उनके कोच का बड़ा योगदान रहा है।