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May 24, 2026
हिमाचल: क्रिकेटर रेणुका ने 3 साल की उम्र में खोए थे पिता, अब उनकी याद को बाजू पर उकेरा; दी अनोखी श्रद्धांजली
पिता के सपने को पूरा किया, अब बाजू पर टैटू गुदवा कर दी अनोखी श्रद्धांजली
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश की स्टार महिला क्रिकेटर रेणुका ठाकुर ने अपने दिवंगत पिता की याद को हमेशा के लिए अपने साथ जोड़ते हुए एक भावुक कदम उठाया है। बचपन में ही पिता को खो देने वाली रेणुका ने अपने दाएं बाजू पर ऐसा विशेष टैटू बनवाया है, जो न केवल पिता-बेटी के अटूट रिश्ते को दर्शाता है, बल्कि उनके संघर्ष, समर्पण और सपनों की पूरी हुई कहानी भी बयां करता है।
रेणुका ठाकुर का जीवन संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल माना जाता है। जब वह महज तीन साल की थीं, तभी उनके पिता केहर सिंह ठाकुर का निधन हो गया था। पिता भले ही इस दुनिया में ज्यादा समय तक अपनी बेटी का साथ नहीं दे पाए, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक सपना जरूर देखा था।
उनका सपना था कि रेणुका क्रिकेट के मैदान में अपनी पहचान बनाए और देश का नाम रोशन करे। समय के साथ पिता की यादें धुंधली होती चली गईं, लेकिन उनका सपना रेणुका के मन में हमेशा जीवित रहा। उन्होंने उसी सपने को अपनी मंजिल बनाया और दिन-रात मेहनत कर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक का सफर तय किया।
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पिता के निधन के बाद परिवार पर कठिन परिस्थितियां आ गई थीं। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेणुका ने अपने इरादों को कमजोर नहीं होने दिया। उनकी मां ने भी हर मुश्किल का सामना करते हुए बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
रोहड़ू की वादियों और पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन रेणुका ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर यह मुकाम हासिल किया। आज वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम की प्रमुख खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं।
अपने क्रिकेट करियर में सफलता हासिल करने के बाद रेणुका ने अपने दिवंगत पिता को एक अनोखी और भावुक श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने अपने दाएं बाजू पर एक विशेष टैटू बनवाया है, जिसमें पिता और बेटी के प्रेम को खूबसूरती से दर्शाया गया है। टैटू में एक पिता अपनी बेटी को स्नेहपूर्वक हवा में उछालते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इस टैटू में उनके पिता की जन्म और पुण्यतिथि भी अंकित की गई है, जिससे यह उनके लिए और भी अधिक भावनात्मक महत्व रखता है। यह टैटू केवल एक चित्र नहीं, बल्कि उस पिता के सपने और बेटी के संघर्ष की कहानी है, जिसे रेणुका ने अपनी मेहनत से साकार किया।
करीबी लोगों का कहना है कि रेणुका आज भी अपनी हर उपलब्धि का श्रेय अपने पिता के सपनों और आशीर्वाद को देती हैं। उनके लिए यह टैटू केवल स्मृति नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें हर कदम पर आगे बढ़ने की ताकत देता है।
रेणुका की मां सुनीता ठाकुर ने बताया कि टैटू बनवाने से पहले बेटी ने उनसे अनुमति ली थी। उन्होंने कहा कि रेणुका बचपन से ही अपने पिता के सपनों को पूरा करने की बात करती थी। आज जब उसने भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है और पिता की याद को इस अनोखे अंदाज में सम्मान दिया है, तो एक मां के रूप में उन्हें अपनी बेटी पर बेहद गर्व है।
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रेणुका ठाकुर की यह कहानी केवल एक क्रिकेटर की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बेटी की कहानी है जिसने बचपन में पिता का साया खोने के बावजूद उनके सपनों को अपनी ताकत बनाया। आज उनका यह भावुक टैटू लाखों युवाओं के लिए संदेश है कि माता-पिता के सपनों को मेहनत और समर्पण से पूरा किया जा सकता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।