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June 16, 2026
हिमाचल का नन्हा बाहुबली: उम्र 9 साल..पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में उठा दिया 80 किलो वजन; जीता गोल्ड
नन्हे खिलाड़ी ने पावरलिफ्टिंग के मंच पर प्रतिभा का मनवाया लोहा
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश प्रतिभाओं की धरती है और यहां हुनर की कोई कमी नहीं है। अक्सर कहा जाता है कि प्रतिभा और हौसले किसी उम्र के मोहताज नहीं होते। बिलासपुर जिले के घुमारवीं उपमंडल के एक 9 वर्षीय बच्चे ने इस कहावत को सच साबित करते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में इस नन्हे खिलाड़ी ने पावरलिफ्टिंग के मंच पर ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया कि दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। धर्मशाला में आयोजित प्रदेश स्तरीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में घुमारवीं के अरमान शर्मा ने अपनी उम्र से कई गुना अधिक वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया और प्रदेशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
ग्राम पंचायत सुनहाणी के गांव मनहन निवासी अरमान शर्मा इस प्रतियोगिता के सबसे कम उम्र के प्रतिभागी थे। प्रतियोगिता में शामिल अन्य खिलाड़ियों की तुलना में अरमान की उम्र बेहद कम थी, लेकिन जब उन्होंने प्रतियोगिता मंच पर कदम रखा तो उनका आत्मविश्वास किसी अनुभवी खिलाड़ी से कम नहीं था।
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दर्शकों की निगाहें उस समय अरमान पर टिक गईं जब उन्होंने 80 किलोग्राम का भारी-भरकम वजन सफलतापूर्वक उठाकर सभी को चौंका दिया। इतनी कम उम्र में इस स्तर का प्रदर्शन न केवल प्रतियोगिता का आकर्षण बना बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का विषय बन गया।
9 साल की उम्र में 80 किलो वजन उठाना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है। अरमान ने न केवल गोल्ड मेडल अपने नाम किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन ने निर्णायकों और दर्शकों को समान रूप से प्रभावित किया। जैसे ही उनके स्वर्ण पदक जीतने की घोषणा हुई, पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
अरमान की इस सफलता के पीछे उनकी निरंतर मेहनत और अनुशासित दिनचर्या को बड़ी वजह माना जा रहा है। परिवार के अनुसार वह नियमित रूप से प्रशिक्षण लेते हैं और खेल के प्रति बेहद समर्पित हैं। उनके माता-पिता का कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। लगातार अभ्यास, लगन और सकारात्मक सोच ही किसी भी खिलाड़ी को आगे बढ़ाती है। अरमान ने भी अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
अरमान की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है। गांव से लेकर घुमारवीं तक लोगों में खुशी का माहौल है। स्थानीय खेल प्रेमियों का मानना है कि इस नन्हे खिलाड़ी में असाधारण प्रतिभा है और यदि उसे बेहतर प्रशिक्षण एवं सुविधाएं मिलती रहीं तो वह आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन कर सकता है।
आज के दौर में जहां मोबाइल और डिजिटल दुनिया बच्चों का अधिकांश समय अपने कब्जे में ले रही है, वहीं अरमान शर्मा की सफलता अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का संदेश लेकर आई है। उनकी उपलब्धि यह बताती है कि यदि बचपन से ही लक्ष्य तय कर मेहनत की जाए तो छोटी उम्र में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
नौ साल के इस नन्हे चैंपियन ने अपनी ताकत, आत्मविश्वास और जुनून के दम पर यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती। यही कारण है कि आज अरमान शर्मा की सफलता की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है और लोग उन्हें हिमाचल का उभरता हुआ "नन्हा बाहुबली" कहकर सम्मानित कर रहे हैं।