शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अब थमती हुई नजर आ रही है। कांग्रेस ने अंतिम समय में प्रत्याशी का ऐलान कर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया है। पार्टी ने कांगड़ा जिला कांग्रेस के अध्यक्ष अनुराग शर्मा को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि इस बार संगठनात्मक नेतृत्व और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी गई है।

 

कांग्रेस के इस फैसले के बाद भाजपा की रणनीति भी साफ हो गई है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतार सकती है, लेकिन कांग्रेस द्वारा कांगड़ा से स्थानीय नेता को टिकट देने के बाद भाजपा ने चुनावी मुकाबले से दूरी बना ली है। कांग्रेस के प्रत्याशी को लेकर पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने भी अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। 

कांग्रेस ने आखिरी वक्त पर किया ऐलान

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा की। पार्टी ने कांगड़ा जिले को राजनीतिक तौर पर महत्व देते हुए वहां के जिलाध्यक्ष अनुराग शर्मा को टिकट दिया। दिलचस्प बात यह भी रही कि उनके जन्मदिन के दिन ही पार्टी ने उन्हें यह बड़ा राजनीतिक तोहफा दिया।

 

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने इस फैसले के जरिए कांगड़ा जैसे बड़े जिले को साधने की कोशिश की है। इससे पहले पार्टी के भीतर कई नामों को लेकर चर्चा चल रही थी कभी पुराने नेताओं का नाम सामने आता था तो कभी नए चेहरे की बात होती थी। कुछ अटकलें बाहरी उम्मीदवार को लेकर भी लगाई जा रही थीं।

भाजपा कर रही थी उम्मीदवार का इंतजार

भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी कांग्रेस के प्रत्याशी की घोषणा का इंतजार कर रही थी। भाजपा यह देखना चाहती थी कि कांग्रेस किसी बाहरी नेता को मैदान में उतारती है या हिमाचल के ही किसी चेहरे को। लेकिन जब कांग्रेस ने स्थानीय नेता अनुराग शर्मा को टिकट दिया तो भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया।

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जयराम ठाकुर की पहली प्रतिक्रिया

कांग्रेस उम्मीदवार की घोषणा से पहले ही होली के मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के अंदर क्या परिस्थितियां बनती हैं] यह उनका आंतरिक मामला है। भाजपा इस पर ज्यादा छेड़छाड़ के मूड में नहीं है] लेकिन पार्टी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि जो भी सांसद राज्यसभा पहुंचे] वह हिमाचल प्रदेश के हितों के लिए काम करने वाला होना चाहिए और प्रदेश की सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

कांग्रेस ने बुलाई विधायक दल की बैठक

उम्मीदवार की घोषणा के बाद कांग्रेस ने तुरंत विधायक दल की बैठक भी बुलाई। इस बैठक में पार्टी के 28 विधायक शामिल हुए और चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। पार्टी नेतृत्व ने सभी विधायकों को एकजुट रहने और किसी भी तरह की राजनीतिक स्थिति के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

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विधानसभा में कांग्रेस के पास बहुमत

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कुल 68 सदस्य हैं। फिलहाल कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 35 वोटों की जरूरत होती है। ऐसे में आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है और अनुराग शर्मा के राज्यसभा पहुंचने की संभावना काफी अधिक बताई जा रही है।

पिछली बार हुआ था बड़ा सियासी उलटफेर

हालांकि पिछले राज्यसभा चुनाव ने प्रदेश की राजनीति को बड़ा झटका दिया था। उस समय भी कांग्रेस के पास बहुमत था, लेकिन मतदान के दिन कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी। इसके साथ ही तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। 

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उस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन को बराबर वोट मिले थे। इसके बाद ड्रॉ ऑफ लॉट्स यानी पर्ची निकालकर फैसला किया गया और भाजपा के हर्ष महाजन राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। यह मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है।

इस बार मुकाबला लगभग साफ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भाजपा के मैदान में उम्मीदवार न उतारने के कारण राज्यसभा चुनाव लगभग एकतरफा हो गया है। कांग्रेस द्वारा स्थानीय संगठन के नेता को टिकट देने से पार्टी के भीतर भी सकारात्मक संदेश गया है। फिलहाल अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांगड़ा से आने वाले अनुराग शर्मा राज्यसभा में हिमाचल की आवाज कितनी मजबूती से उठा पाते हैं।

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