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March 5, 2026
हिमाचल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास : मरीज के कूल्हे से निकाला एक किलो ट्यूमर, कई घंटे चली सर्जरी
मरीज की हालत स्थिर, तेजी से हो रही रिकवरी
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कांगड़ा। जिला कांगड़ा के तहत आने वाले फतेहपुर स्थित CHC में चिकित्सा क्षेत्र की एक उल्लेखनीय सफलता सामने आई है। यहां जनरल सर्जन डॉ. प्रणिता और उनकी टीम ने ज्वाली निवासी रघुवीर सिंह के कूल्हे से लगभग एक किलोग्राम वजन का बड़ा ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर मरीज को नया जीवन दिया है।
जानकारी के अनुसार, ज्वाली क्षेत्र का रहने वाला रघुवीर सिंह पिछले कई महीनों से कूल्हे में तेज दर्द और बढ़ती सूजन की समस्या से परेशान था। शुरुआत में उसने सामान्य दर्द समझकर स्थानीय स्तर पर उपचार लिया। मगर सूजन का आकार बढ़ने और चलने-फिरने में कठिनाई होने पर उसने CHC फतेहपुर में विशेषज्ञ परामर्श लिया।
अस्पताल में जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि कूल्हे के आसपास असामान्य रूप से विकसित हो रहा एक ठोस ट्यूमर दर्द और सूजन का कारण है। आवश्यक परीक्षणों के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया।

डॉ. प्रणिता के नेतृत्व में गठित टीम ने ऑपरेशन की पूरी तैयारी के साथ सर्जरी को अंजाम दिया। कूल्हे का क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां नसों और मांसपेशियों का जाल जटिल होता है। ऐसे में सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी बरती गई, ताकि किसी भी नस या हड्डी को नुकसान न पहुंचे।
कई घंटों तक चले इस ऑपरेशन में टीम ने सफलतापूर्वक लगभग एक किलो वजनी ट्यूमर को बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
सर्जरी के बाद निकाले गए ट्यूमर को आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। बायोप्सी रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ट्यूमर सौम्य (बेनाइन) था या घातक (मैलिग्नेंट)। फिलहाल डॉक्टरों ने बताया है कि मरीज की रिकवरी संतोषजनक है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय लोगों और अस्पताल प्रशासन ने इस सफल सर्जरी को बड़ी उपलब्धि बताया है। आमतौर पर इस प्रकार की जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को बड़े मेडिकल कॉलेज या शहरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। लेकिन CHC फतेहपुर में ही यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक होना क्षेत्रवासियों के लिए राहत की बात है।
ऑपरेशन के बाद मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ का धन्यवाद किया। उनका कहना है कि समय पर सही उपचार मिलने से एक बड़ी परेशानी टल गई।
यह सफलता न केवल एक मरीज के जीवन में राहत लेकर आई है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत करने वाली साबित हो रही है।