शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में लगातार दो दिनों से सियासी गर्माहट चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है।
हिमाचल विधानसभा की तीसरी बैठक
अब आज विधानसभा की तीसरी बैठक होने जा रही है, जिस पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ प्रदेश की जनता की भी नजर रहेगी। दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी और विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
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सदन में पूछे जाएंगे 56 प्रश्न
तीसरे दिन के लिए प्रश्नकाल भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदन में कुल 56 प्रश्न सूचीबद्ध हैं, जिनमें 42 तारांकित और 14 आतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इन सवालों के माध्यम से विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, विकास योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। प्रश्नकाल के दौरान सरकार को कई विषयों पर विस्तृत जवाब देना पड़ सकता है।
रिक्त पदों पर सरकार से जवाब की मांग
दिन का पहला और अहम सवाल झंडूता विधानसभा क्षेत्र के विधायक जीआर कटवाल की ओर से उठाया गया है। उनका प्रश्न प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने से संबंधित है। विधायक ने सरकार से 1 जनवरी 2023 से 31 जुलाई 2025 तक विभिन्न विभागों और श्रेणियों में पैदा हुई रिक्तियों का पूरा विवरण मांगा है।
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आपस में भिड़ेंगे सता पक्ष और विपक्ष
इसके साथ ही सरकार से यह भी पूछा गया है कि इस अवधि के दौरान नियमित नियुक्तियों के अलावा अनुबंध और दैनिक वेतन के आधार पर कितने लोगों को रोजगार दिया गया। सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पद और भर्ती प्रक्रिया की रफ्तार प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि विपक्ष इस मुद्दे को सदन में प्रमुखता से उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा।
रोजगार का मुद्दा गरमाएगा
विधायक ने युवाओं के लिए शुरू की गई स्वरोजगार योजनाओं का भी ब्यौरा मांगा है। सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि युवाओं को अपना रोजगार शुरू करने के लिए किन-किन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है और अब तक इन योजनाओं से कितने लोग लाभान्वित हो चुके हैं। बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों से जुड़ा यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है।
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विकास कार्यों और क्षेत्रीय समस्याओं पर भी होंगे सवाल
सदन में सूचीबद्ध अन्य प्रश्नों में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्य, सड़कें, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागीय व्यवस्थाओं से संबंधित मामले शामिल हैं। विधायक अपने क्षेत्रों की लंबित योजनाओं और लोगों की समस्याओं को सरकार के सामने रखेंगे। प्रश्नकाल के दौरान मंत्रियों को संबंधित विभागों की स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।
राजनीतिक टकराव देखने को मिलेगा
पिछले दो दिनों के दौरान सदन में जिस तरह से राजनीतिक टकराव देखने को मिला है, उसके बाद सोमवार की कार्यवाही को काफी अहम माना जा रहा है। विपक्ष जहां सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए तैयार है, वहीं सत्तापक्ष भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा। ऐसे में प्रश्नकाल शांतिपूर्ण ढंग से चलेगा या फिर एक बार फिर हंगामे की स्थिति बनेगी, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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प्रश्नकाल के बाद विधायी कार्य भी रहेगा व्यस्त
विधानसभा की तीसरी बैठक में प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कामकाज भी निपटाया जाएगा। साप्ताहिक शासकीय कार्यों की जानकारी सदन के सामने रखी जाएगी। इसके बाद विभिन्न विधेयकों से संबंधित कार्यवाही होने की संभावना है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सदन के पटल पर प्रस्तुत किए जाएंगे।
बैठक के दौरान सरकार की ओर से अध्यादेश भी सदन के समक्ष रखे जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े कागजात और विधानसभा की समितियों द्वारा तैयार किए गए प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए जाने हैं। सदन की समितियों की रिपोर्टों के माध्यम से प्रशासनिक और विभागीय मामलों से जुड़े कई विषयों की जानकारी विधायकों के सामने आएगी।
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ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर भी हो सकती है चर्चा
सोमवार की कार्यवाही में नियम 62 के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए जाएंगे। इसके माध्यम से विधायक प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण और जनहित के मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर सकेंगे। इसके अलावा नियम 130 के तहत भी प्रस्ताव सदन में रखे जाने हैं। इन प्रस्तावों पर होने वाली चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
