#राजनीति
August 18, 2026
सुधीर शर्मा से विजिलेंस ने दो घंटे की पूछताछ, बाहर निकलते ही CM सुक्खू पर निकाली भड़ास
सुधीर शर्मा बोले. राजनीतिक दबाव में हो रही कार्रवाई, सदन में सरकार को घेरेंगे
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व मंत्री एवं धर्मशाला से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुधीर शर्मा मंगलवार को आय से अधिक संपत्ति मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ;विजिलेंसद्ध के धर्मशाला स्थित कार्यालय में पेश हुए। सुबह करीब 11रू50 बजे शुरू हुई यह पूछताछ दोपहर 1रू50 बजे तक चली। करीब दो घंटे चली इस पूछताछ के बाद जब सुधीर शर्मा विजिलेंस कार्यालय से बाहर आए तो उन्होंने जमकर सीएम सुक्खू पर अपना गुब्बार निकाला। सुधीर शर्मा ने प्रदेश की कांग्रेस और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगाए।
दो घंटे तक
सुधीर शर्मा सुबह करीब 11:50 बजे विजिलेंस कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ चली। जांच एजेंसी की ओर से बैंक खातों, संपत्तियों, निवेश, शेयर, डीमैट खातों, वाहनों और अन्य वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों को लेकर जानकारी मांगी गई। शर्मा ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और उनके पास उपलब्ध सभी संबंधित रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान दाखिल किए गए उनके हलफनामे सार्वजनिक हैं और उनमें चल-अचल संपत्तियों का विवरण दिया गया है। ऐसे में संपत्ति छिपाने के आरोपों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच एजेंसी को किसी विशेष संपत्ति को लेकर आपत्ति है तो उसका नाम और उससे संबंधित रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से सामने रखा जाना चाहिए।
विजिलेंस कार्यालय से बाहर आने के बाद सुधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई विपक्षी नेता सरकार के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाता है तो उसे इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। शर्मा ने कहा कि उन्हें जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जांच निष्पक्ष, तथ्य आधारित और सभी के लिए समान होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि सरकार और उसकी जांच एजेंसियों के पास सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं। संपत्तियों के पंजीकरण से लेकर बैंक खातों और निवेश तक का विवरण संबंधित संस्थानों में दर्ज रहता है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि सार्वजनिक दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी को आखिर कैसे छिपाया जा सकता है।
सुधीर शर्मा ने बताया कि संबंधित अवधि में बैजनाथ में स्थित पैतृक भूमि के दो हिस्सों की बिक्री हुई थी। उन्होंने दोनों लेन-देन की कुल राशि 74.07 लाख रुपये बताई और कहा कि दोनों रजिस्ट्रियां विधिवत पंजीकृत हैं तथा उनका रिकॉर्ड सरकारी विभागों में उपलब्ध है। उन्होंने एक अन्य संपत्ति की 14.50 लाख रुपये में हुई बिक्री का भी जिक्र किया। शर्मा के अनुसार, इस लेन-देन के बारे में नोटिस में अलग से जानकारी नहीं मांगी गई थी, फिर भी उन्होंने पारदर्शिता बरतते हुए इसका विवरण जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया है। उनका कहना था कि वह जांच से बचने के बजाय हर संबंधित दस्तावेज जांच एजेंसी के सामने रखने को तैयार हैं।
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सुधीर शर्मा ने मामले की टाइमलाइन को लेकर भी सरकार पर सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि जिस अवधि से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है, उस दौरान प्रदेश में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी और वह स्वयं मंत्री रहे थे। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले वर्षों में इस मामले को लेकर सरकार ने क्या कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी के पास ठोस तथ्य हैं तो उन्हें सामने रखा जाना चाहिए। केवल राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से किसी मामले का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
सुधीर शर्मा के विजिलेंस जांच में शामिल होने के दौरान कार्यालय के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी रही। कई कार्यकर्ता बांह पर काली पट्टी बांधकर पहुंचे और कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने विजिलेंस कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी।
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भाजपा विधायक ने स्पष्ट किया कि उन्हें कानूनी जांच से कोई परेशानी नहीं है। उनका कहना था कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। उनकी आपत्ति कथित तौर पर चयनात्मक कार्रवाई को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। शर्मा ने कहा कि वह चाहते हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हो तथा सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर तथ्यों की पुष्टि की जाए।

सुधीर शर्मा ने आगामी विधानसभा मानसून सत्र को भी इस पूरे मामले से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगारी, विकास और अन्य जनहित के मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है और इसी बीच विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में भाजपा सरकार से जनता से जुड़े सवालों का जवाब मांगेगी। शर्मा ने दावा किया कि जांच या मुकदमे उन्हें जनता की आवाज उठाने से नहीं रोक सकते।
पूछताछ के बाद सुधीर शर्मा ने एक तरफ जांच प्रक्रिया में सहयोग जारी रखने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाकर अपना सियासी रुख भी स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास अपनी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत के अनुसार इन्हें जांच एजेंसी के समक्ष रखा जाएगा।'