#राजनीति
August 22, 2026
हिमाचल विधानसभा के दूसरे दिन भी सरकार और विपक्ष में टकराव, स्थगित करनी पड़ी कार्रवाई
विपक्ष की चुनौती: राष्ट्रगान अपमान को साबित करो, नहीं तो सार्वजनिक माफी मांगेंगे आप
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन भी सियासी घमासान के साथ शुरू हुआ। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सदन के भीतर और बाहर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है। शनिवार को कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस और भाजपा विधायक दल ने विधानसभा परिसर में अलग-अलग प्रदर्शन कर एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद सदन के भीतर भी यही मुद्दा छाया रहा और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
मानसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायक दल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने भाजपा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और भाजपा से जनता से माफी मांगने की मांग उठाई। सत्ता पक्ष का कहना था कि विधानसभा जैसे संवैधानिक संस्थान में राष्ट्रगान की मर्यादा और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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वहीं भाजपा विधायक दल ने भी जवाबी प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस सरकार पर पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। विपक्ष की ओर से ‘वंदे मातरम् का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ जैसे नारे लगाए गए। इस तरह दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर में राजनीतिक तापमान बढ़ गया।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए विधानसभा के भीतर राष्ट्रगान के दौरान हुई पूरी घटना की लाइव रिकॉर्डिंग विपक्ष के विधायकों को उपलब्ध करवाने की मांग की। उनका कहना था कि वीडियो सामने आने के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि राष्ट्रगान के दौरान किस विधायक ने क्या किया। जयराम ठाकुर के मुताबिक भाजपा के सभी विधायक राष्ट्रगान के दौरान सावधान की मुद्रा में खड़े थे और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान में शामिल हुए। उनके अनुसार राष्ट्रगान समाप्त होने के बाद भाजपा विधायकों ने केवल यह सवाल उठाया कि सदन में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ क्यों नहीं गाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी सवाल को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
जयराम ठाकुर ने यहां तक कहा कि यदि वीडियो रिकॉर्डिंग से भाजपा विधायकों पर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो भाजपा जवाब देने के लिए तैयार है। लेकिन यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायकों को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
राष्ट्रगान के विवाद के साथ ही वंदे मातरम् को लेकर भी भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कांग्रेस की बैठक में राष्ट्रगीत की दो ही अंतरे गाने की बात सामने आने का उल्लेख था। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि वंदे मातरम् को किस तरह और कितने हिस्से में गाया जाना है, इसका फैसला किसी राजनीतिक दल की बैठक में नहीं बल्कि निर्धारित नियमों और व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा की परंपराओं और मर्यादाओं को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर सदन के गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। सुक्खू ने कहा कि मानसून सत्र को लंबा रखा गया है ताकि प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हो सके। बेरोजगारी, विकास, भ्रष्टाचार, पेपर लीक और प्रदेश की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर सदन में गंभीर बहस की जरूरत है। उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और प्रदेश हित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा करने का आग्रह किया।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया जब मामला प्रश्नकाल के बाद सदन के भीतर भी गरमा गया। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान को लेकर माफी की मांग की और सदन में संबंधित वीडियो क्लिप दिखाने की मांग दोहराई। मुख्यमंत्री सुक्खू ने पलटवार करते हुए भाजपा विधायक दल पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया। हंगामे के दौरान मुख्यमंत्री ने भी सदन में नारे लगाए। विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत का अपमान होगा तो नारे भी लगाए जाएंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नारेबाजी हुई और हंगामे के बीच सदन की बैठक दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।