#राजनीति
August 19, 2026
हिमाचल भाजपा के एक और विधायक पर विजिलेंस ने कसा शिकंजा, पूछताछ के लिए किया तलब
सुधीर शर्मा के बाद अब विधायक जनक से होगी पूछताछ
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विजिलेंस जांच को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा विधायकों पर विजिलेंस की बढ़ती जांच ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। पिछले कुछ दिनों में जांच एजेंसी ने भाजपा से जुड़े कई नेताओं और पूर्व विधायकों से जुड़े मामलों में जांच का दायरा बढ़ाया है। धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा से पूछताछ के बाद अब भरमौर से भाजपा विधायक डॉ. जनक राज को हिमकेयर योजना से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
विजिलेंस की कार्रवाई के बीच अब भाजपा के एक और मौजूदा विधायक से पूछताछ होने जा रही है। मंगलवार को धर्मशाला विधायक सुधीर शर्मा से विजिलेंस पूछताछ कर चुकी है और अब वीरवार को भरमौर विधायक डॉ. जनक राज से सवाल-जवाब होंगे। इससे प्रदेश की राजनीति में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
डॉ. जनक राज को बुलाने का संबंध उनके आईजीएमसी शिमला में चिकित्सा अधीक्षक के कार्यकाल से बताया जा रहा है। विजिलेंस हिमकेयर योजना के तहत अस्पताल से जुड़े दावों, बिलों की मंजूरी और भुगतान प्रक्रिया में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हिमकेयर के तहत मरीजों के उपचार से जुड़े दावों की जांच किस स्तर पर हुई, भुगतान से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं और संबंधित दस्तावेजों को किस स्तर पर मंजूरी दी गई।
डॉ. जनक राज वर्ष 2018 में आईजीएमसी शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक नियुक्त हुए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने पद से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर भरमौर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। अब विजिलेंस उनके एमएस कार्यकाल के दौरान हिमकेयर से जुड़े दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया को खंगाल रही है। पूछताछ के दौरान उनसे अस्पताल प्रशासन में उनकी भूमिका और संबंधित फाइलों पर हुई कार्रवाई को लेकर जानकारी ली जा सकती है।
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हिमकेयर हिमाचल प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसके तहत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। विजिलेंस इस योजना के तहत उपचार और भुगतान से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है। जांच के दायरे में कथित तौर पर ऐसे दावे भी हैं, जिनमें फर्जी मरीजों की एंट्री, गलत दावे, उपचार खर्च में अनियमितता अथवा नियमों के विपरीत भुगतान जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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विजिलेंस की जांच अब आईजीएमसी शिमला से जुड़े हिमकेयर दावों तक पहुंच गई है। एजेंसी यह देख रही है कि अस्पताल में मरीजों के उपचार से जुड़े दावों की जांच और सत्यापन किस तरीके से किया गया था। भुगतान से पहले जरूरी औपचारिकताएं पूरी हुई थीं या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
विजिलेंस के नोटिस के बाद डॉ. जनक राज ने साफ किया है कि वह जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि वह जांच एजेंसी के हर सवाल का जवाब देंगे और पूरी जानकारी जांच अधिकारियों के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार जितनी जल्दी इस मामले की जांच चाहती है, उतनी ही जल्दी वह भी चाहते हैं कि मामले का पूरा सच सामने आए। उनके मुताबिक वह निर्धारित समय पर विजिलेंस मुख्यालय पहुंचेंगे।
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हालांकि डॉ. जनक राज ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह किसी तरह के दबाव में आने वाले नहीं हैं।
विजिलेंस की हालिया गतिविधियों ने हिमाचल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक के बाद एक भाजपा नेताओं से पूछताछ और जांच का दायरा बढ़ने से विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। भाजपा जहां इसे राजनीतिक दबाव के तौर पर देख रही है, वहीं सरकार की ओर से जांच को कानून के अनुसार होने वाली कार्रवाई बताया जा रहा है।
अब सबकी नजरें वीरवार को होने वाली डॉ. जनक राज की विजिलेंस पूछताछ पर टिकी हैं। पूछताछ में जांच एजेंसी उनसे हिमकेयर दावों और आईजीएमसी में उनके कार्यकाल के दौरान हुई प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछ सकती है। इस पूछताछ के बाद हिमकेयर मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या नए नाम या तथ्य सामने आते हैं, यह देखना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से अहम होगा।