शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों की दस्तक के बीच सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर नाराजगी का उबाल शांत करने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी के भीतर उभर रही नाराजगी को थामने के लिए शीर्ष नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पार्टी के दो कद्दावर चेहरों पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर के तीखे तेवरों ने सरकार और संगठन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पंचायत चुनाव की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस के लिए इन दो दिग्गजों की बेरुखी राजनीतिक रूप से आत्मघाती साबित हो सकती है, जिसे भांपते हुए दोनों नेताओं की नाराजगी को दूर करना अब कांग्रेस की प्राथमिकता बन गया है। रजनी पाटिल ने गिले शिकवे मिटाने का दौर शुरू कर दिया है।
आनंद शर्मा से बंद कमरे में मंथन
प्रदेश मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल ने शिमला पहुंचकर वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा से मुलाकात की और संगठनात्मक मुद्दों के साथ.साथ उनकी नाराजगी के कारणों पर विस्तार से चर्चा की। सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अनुभवी नेताओं की असंतुष्टि चुनाव से पहले ही खत्म कर दी जाए। मुलाकात के बाद रजनी पाटिल ने कहा कि आनंद शर्मा एनएसयूआई के दौर से कांग्रेस की बुनियाद रहे हैं। जो काम करता है, उसका नाराज होना स्वभाविक है। वह पार्टी के अटूट अंग हैं और कहीं नहीं जा रहे।
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कौल सिंह ठाकुर के तेवर भी बने चुनौती
वहीं, वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर की नाराजगी भी पार्टी के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। उन्होंने हाल ही में खुले मंच से संगठन और सरकार के बीच तालमेल की कमी, कार्यकर्ताओं की अनदेखी और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए थे। कौल सिंह का कहना है कि कार्यकर्ताओं की अनदेखी से असंतोष बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर सरकार के कामकाज पर पड़ सकता है।
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कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी एजेंडे में
कांग्रेस नेतृत्व अब सिर्फ बड़े नेताओं ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की नाराजगी को भी गंभीरता से ले रहा है। ट्रांसफर, लंबित फाइलों और स्थानीय मुद्दों को लेकर उठ रही शिकायतों को सुलझाने के लिए भी मंथन जारी है। पार्टी यह समझ चुकी है कि पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं की भूमिका निर्णायक होती है।
दिग्गजों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
राजनीतिज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनावों में जिला परिषदों और प्रधानों के पदों पर कब्जा जमाने के लिए आनंद शर्मा और कौल सिंह ठाकुर जैसे नेताओं का साथ कांग्रेस के लिए अनिवार्य है। यदि कौल सिंह मंडी बेल्ट में और आनंद शर्मा राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नहीं होते, तो भाजपा इस अंतर्कलह का फायदा उठा सकती है। इसी डैमेज को रोकने के लिए रजनी पाटिल इन दोनों नेताओं को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही हैं।
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राजीव भवन में मंथन, चुनावी रणनीति पर जोर
शिमला स्थित राजीव भवन में प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार की अध्यक्षता में जनरल हाउस की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने, सरकार और संगठन के बीच तालमेल बेहतर करने और आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। बैठक में कई वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद हैं, जबकि मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री भी इसमें शामिल होने वाले हैं।
क्या सफल होगी प्रभारी की रणनीति?
हिमाचल कांग्रेस के लिए यह समय चुनौतियों भरा है। एक तरफ सरकार के कामकाज को जनता तक ले जाना है, तो दूसरी तरफ अपने ही पुराने वफादारों को एकजुट रखना है। रजनी पाटिल की आनंद शर्मा और कौल सिंह ठाकुर से मुलाकातों ने फिलहाल के लिए राजनीतिक पारा तो गिरा दिया है, लेकिन क्या यह शांति पंचायत चुनावों तक बनी रहेगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
