शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आया राम.गया राम की संस्कृति पर लगाम लगाने के लिए सुक्खू सरकार ने एक बड़ा और कड़ा विधायी प्रहार किया है। विधानसभा के बजट सत्र में आज विपक्ष के भारी शोर.शराबे और विरोध के बीच हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पेंशन संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया गया।


इस नए कानून के तहत यदि कोई विधायक संविधान की 10वीं अनुसूची के अंतर्गत दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होता है, तो उसे ताउम्र मिलने वाली पेंशन से हाथ धोना पड़ेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस कदम को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनादेश के साथ खिलवाड़ करने वालों को सबक सिखाने के तौर पर देखा जा रहा है।

जनादेश से गद्दारी तो पेंशन पर भी आरी

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में स्पष्ट किया कि यह संशोधन विधेयक केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि दलबदल की राजनीति को हतोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा संकल्प है। उन्होंने कहा कि जो विधायक जनता के विश्वास को बेचकर दल बदलते हैं, उन्हें जनता के टैक्स के पैसे से पेंशन लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। सरकार का मानना है कि इस कानून से भविष्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

 

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दो पूर्व विधायकों की पेंशन पर गिरी गाज

इस नए कानून की सबसे पहली और सीधी मार उन दो पूर्व विधायकों पर पड़ने वाली है, जिन्होंने फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग कर सुक्खू सरकार की नींव हिलाने की कोशिश की थी। गगरेट से पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन अब पूरी तरह बंद हो जाएगी। चूंकि ये दोनों पहली बार सदन पहुंचे थे और दलबदल के कारण अयोग्य हुए, इसलिए अब ये पूर्व विधायक होने के बावजूद 50 हजार रुपये की मासिक पेंशन के हकदार नहीं रहेंगे।

 

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विपक्ष का वॉकआउट: जयराम ने बताया बदले की भावना

सदन में जब मुख्यमंत्री ने यह विधेयक पेश कियाए तो नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने इस पर तीखी आपत्ति जताई। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कदम बताया। हालांकि, सरकार ने बहुमत के आधार पर विपक्ष के विरोध को दरकिनार करते हुए इसे पारित कर दिया। यह विधेयक अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद 14वीं विधानसभा और उसके बाद के सभी निर्वाचित सदस्यों पर लागू होगा।

 

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क्या कहता है नया नियम और पेंशन का गणित

हिमाचल प्रदेश में वर्तमान नियमों के अनुसार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले विधायक को ₹50,000 मासिक पेंशन मिलती है, और इसके बाद हर अतिरिक्त साल के लिए ₹1,000 की बढ़ोत्तरी होती है। लेकिन अब नए संशोधन के बाद दलबदल के दोषी, अयोग्य घोषित होते ही पेंशन के लाभ समाप्त।

राजस्व पर बोझ नहीं

इस संशोधन की एक खास बात यह है कि इससे राज्य के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगाए बल्कि अयोग्य विधायकों की पेंशन रुकने से बचत ही होगी। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि यह कानून किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि हिमाचल की राजनीतिक शुचिता को बचाने के लिए लाया गया है, ताकि कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के वोट का सौदा न कर सके।

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