#राजनीति

May 12, 2026

जयराम के गढ़ में सुक्खू सरकार का बड़ा दांव, मैदान में उतारी दो बार विधानसभा चुनाव हारी प्रत्याशी

कांग्रेस ने जिला परिषद चुनाव में उतारी कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर

शेयर करें:

himachal panchyat election

मंडी। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और जिला परिषद चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल ग्रामीण सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लेकिन इस बार सबसे हॉट मुकाबला मंडी जिला में देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र में कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के प्रभाव वाले इस जिले और सदर विधायक अनिल शर्मा के 'गढ़' माने जाने वाले कोटली वार्ड को फतह करने के लिए सुक्खू सरकार ने एक बहुत बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।  सुक्खू सरकार ने जिला परिषद चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस की जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर को मैदान में उतारकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। 

अनिल शर्मा की विरासत बनाम सुक्खू का रणनीतिक चक्रव्यूह

कोटली क्षेत्र हमेशा से सदर विधायक अनिल शर्मा का मजबूत आधार रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुक्खू सरकार ने चंपा ठाकुर जैसी कद्दावर और अनुभवी नेत्री को उतारकर अनिल शर्मा के घर में ही उन्हें घेरने की योजना बनाई है। हालांकि चंपा ठाकुर 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में अनिल शर्मा के हाथों हार का स्वाद चख चुकी हैं। इतना ही नहीं चंपा ठाकुर के पिता कौल सिंह ठाकुर भी पिछले चुनाव में हार का सामना कर चुके हैं। ऐसे में दोनों बाप बेटी के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। 

 

यह भी पढ़ें : जीत कर भगवान के पास जाना चाहता हूं... हिमाचल BJP के 92 वर्षीय पूर्व CM की भावुक अपील

नामांकन के साथ शक्ति प्रदर्शन

सोमवार को चंपा ठाकुर ने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ जोरदार शक्ति प्रदर्शन करते हुए नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन से पहले कोटली क्षेत्र में रैली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में कांग्रेस के झंडों और नारों के बीच माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आया। कांग्रेस इस चुनाव को केवल जिला परिषद का सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा के मजबूत गढ़ में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के अवसर के रूप में देख रही है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: बिजली-पानी के बिना टूटा महिला का सब्र, बच्चों संग DC ऑफिस पहुंच दी आ*त्मदा.ह की चेतावनी

भाजपा के गढ़ में कांग्रेस की सीधी चुनौती

कोटली जिला परिषद वार्ड लंबे समय से भाजपा और विशेष रूप से अनिल शर्मा के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में यहां कांग्रेस द्वारा मजबूत उम्मीदवार उतारना सीधे तौर पर भाजपा को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने यह दांव सोच-समझकर खेला है, ताकि मंडी की राजनीति में भाजपा के दबदबे को चुनौती दी जा सके। यही वजह है कि अब यह चुनाव स्थानीय से ज्यादा प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता जा रहा है।

 

यह भी पढ़ें : BREAKING: NEET UG 2026 परीक्षा हुई रद्द: पेपर लीक की आशंका - CBI जांच करेगी

राजनीति जमीन मजबूत करेंगे चंपा और कौल सिंह 

चंपा ठाकुर कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी हैं। कौल सिंह ठाकुर हिमाचल की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और कई बार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी शामिल रहे। हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। अब माना जा रहा है कि जिला परिषद चुनाव चंपा ठाकुर और कौल सिंह ठाकुर दोनों के लिए राजनीतिक जमीन मजबूत करने का अहम अवसर बन गया है।

 

यह भी पढ़ें : नशे के खिलाफ सुक्खू सरकार का सबसे बड़ा फैसला- अब सरकारी नौकरी से पहले होगा चिट्टा टेस्ट

सुक्खू सरकार की प्रतिष्ठा भी दांव पर

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। भाजपा के प्रभाव वाले इलाके में जीत दर्ज कर कांग्रेस ग्रामीण राजनीति में बड़ा संदेश देना चाहती है। यही कारण है कि कांग्रेस संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुका है। दूसरी ओर भाजपा भी अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी रणनीति के साथ चुनाव प्रचार में जुटी हुई है।

क्या है चंपा ठाकुर की प्राथमिकता

नामांकन के दौरान चंपा ठाकुर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता क्षेत्र को सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं से बेहतर तरीके से जोड़ना होगा। उन्होंने दावा किया कि जनता बदलाव चाहती है और इस बार कांग्रेस को भरपूर समर्थन मिलेगा।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में ढह गया करोड़ों की लागत से बन रहा पुल, विक्रमादित्य के दावों की खुली पोल

 

अब यह चुनाव केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे राजनीतिक विरासत, प्रतिष्ठा और वर्चस्व की लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। मंडी जिला का यह मुकाबला आने वाले दिनों में हिमाचल की राजनीति का सबसे चर्चित चुनावी रण बन सकता है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख