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April 2, 2026

सदन में गरजी मिसेज सीएम: अपनी ही सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री- विक्रमादित्य सिंह को दिखाया आईना

सड़क निर्माण कंपनी की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया

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Kamlesh Thakur vs Government

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को एक दिलचस्प और तीखा राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी और देहरा से कांग्रेस विधायक कमलेश ठाकुर ने अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवालिया निशान खड़े कर दिए। देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर ने अपनी विधानसभा में कछुआ चाल से चल रहे सड़क निर्माण कार्यों और निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं को लेकर सदन में मोर्चा खोल दिया।

 

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उन्होंने सीधे तौर पर एक बाहरी निर्माण कंपनी की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। सदन में गूंजी मिसेज सीएम की इस तलख आवाज ने कुछ देर के लिए हलचल पैदा कर दी और मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह को सदन में बचाव की मुद्रा में आना पड़ा।

सदन में विधायक कमलेश के तलख तेवर

हिमाचल की राजनीति में उस समय माहौल गरमा गया, जब मिसेज सीएम यानी कमलेश ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सदन में आमने-सामने आए। प्रश्नकाल के दौरान देहरा की विधायक ने बेहद तल्ख लहजे में अपनी ही सरकार को घेरते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में पांच महत्वपूर्ण सड़कों का काम अधर में लटका हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ की एक कंपनी को यह ठेका दिया गया है, जो काम को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। विधायक के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया कि वह क्षेत्र की जनता की समस्याओं के आगे किसी भी रिश्ते या सत्ता के दबाव में आने वाली नहीं हैं।

 

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केमिकल और धूल जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़

विधायक कमलेश ठाकुर ने सदन को बताया कि सड़कों की खुदाई के कारण पूरे इलाके में धूल.मिट्टी का साम्राज्य है, जिससे पैदल चलना दूभर हो गया है। सबसे गंभीर आरोप उन्होंने सड़क निर्माण में इस्तेमाल हो रहे केमिकल को लेकर लगाया। ठाकुर ने कहा कि कंपनी जिस रसायन का प्रयोग कर रही है, उसका लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से दो टूक शब्दों में कहा कि इस कंपनी के खिलाफ न केवल जांच हो, बल्कि सख्त कार्रवाई भी अमल में लाई जाए।

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उत्तराखंड में ब्लैक लिस्टेड कंपनी को हिमाचल में पैकेज

इस बहस में ज्वालामुखी से कांग्रेस विधायक संजय रतन ने भी घी डालने का काम किया। उन्होंने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि जिस कंपनी को हिमाचल सरकार ने 26 सड़कों का बंपर पैकेज दिया है, उसे उत्तराखंड में पहले ही ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। रतन ने आरोप लगाया कि कंपनी के अधिकारी ऊंचे पदों पर बैठे अफसरों से सेटिंग कर बार.बार काम की समय सीमा बढ़वा रहे हैं। उन्होंने हिमाचली ठेकेदारों की पैरवी करते हुए कहा कि जो कंपनी काम आउटसोर्स कर रही है, उससे टेंडर तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

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विक्रमादित्य की सफाई 

सदन में घिरती सरकार को बचाने के लिए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्थिति को संभालते हुए घोषणा की कि कंपनी के कामकाज की जांच के लिए प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। मंत्री ने विश्वास दिलाया कि यदि कमेटी की रिपोर्ट में जरा भी खामी मिली, तो कंपनी का टेंडर तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उक्त कंपनी पर पहले भी लापरवाही के लिए जुर्माना लगाया जा चुका है।

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सीएम का तर्क

अंत में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वयं चर्चा में हस्तक्षेप किया। उन्होंने अपनी विधायक पत्नी और संजय रतन की चिंताओं को जायज ठहराते हुए कहा कि पंजाब के कई ठेकेदारों ने हिमाचल में टेंडर तो ले लिए हैं, लेकिन वे यहां की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को नहीं समझते। सीएम ने कहा कि भारी मशीनों से की जा रही अनियंत्रित खुदाई से पहाड़ दरक रहे हैं और जमीन हिल रही है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में सरकार एक कंपनी को ढेरों सड़कों के बजाय उसकी क्षमता के आधार पर केवल एक या दो सड़कें देने की नीति पर विचार करेगी।

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