#राजनीति
May 18, 2026
मंडी ने बदला सियासी मूड- जयराम ठाकुर के गढ़ में BJP को बड़ा झटका, कांग्रेस ने लगाई सेंध
व्यक्तिगत पकड़ पार्टी लाइन से ज्यादा प्रभावी
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में नगर निकाय चुनावों ने इस बार सियासी समीकरण बदल दिए हैं। लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस जिले में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बेहतर प्रदर्शन ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है।
खासकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। नेरचौक समेत कई निकायों में कांग्रेस ने बढ़त बनाकर साफ संकेत दे दिए हैं कि मंडी की राजनीति में अब मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प हो चुका है।
दरअसल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह जिले में आए नतीजों ने दोनों दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिले के छह शहरी निकायों के कुल 48 वार्डों में हुए चुनावों में कांग्रेस समर्थित 23 उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि भाजपा समर्थित 19 प्रत्याशी ही जीत दर्ज कर सके।
वहीं 6 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। इन परिणामों से साफ है कि कई क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत पकड़ पार्टी लाइन से ज्यादा प्रभावी रही।
नगर परिषद नेरचौक में भाजपा को सबसे बड़ा झटका लगा। यहां कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 8 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा सिर्फ एक सीट ही बचा पाई। यह सीट भी बेहद कम अंतर से जीती गई। नेरचौक भाजपा विधायक इंद्र सिंह गांधी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, ऐसे में परिणामों ने पार्टी संगठन की चिंता बढ़ा दी है।
करसोग और रिवालसर में भी कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा। करसोग में कांग्रेस समर्थित 4 उम्मीदवार जीते, जबकि भाजपा को केवल एक सीट मिली। रिवालसर में कांग्रेस ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया और भाजपा दो सीटों तक सिमट गई। इन जीतों के बाद कांग्रेस समर्थकों ने कई जगह जश्न मनाया।
हालांकि सुंदरनगर में भाजपा ने दमदार वापसी करते हुए 9 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा बचा ली। यहां कांग्रेस को केवल दो सीटों पर सफलता मिली, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी रहे। जोगिंद्रनगर और सरकाघाट में मुकाबला कड़ा रहा, जहां दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
अब सबकी नजर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनावों पर टिकी है। कई निकायों में स्पष्ट बहुमत न होने के कारण निर्दलीय पार्षद सत्ता गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे आने वाले समय में मंडी जिले की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।